होटल में भजिया खाकर तेल पी जाता था भालू, 59 दिन बाद रेस्क्यू: गुड़-नारियल के लालच में पिंजरे में फंसा; घायल पैर का जंगल सफारी में होगा इलाज

होटल में भजिया खाकर तेल पी जाता था भालू, 59 दिन बाद रेस्क्यू: गुड़-नारियल के लालच में पिंजरे में फंसा; घायल पैर का जंगल सफारी में होगा इलाज

बालोद। जिले के रानीमाई मंदिर के आसपास करीब 59 दिनों से घूम रहे एक घायल भालू को आखिरकार वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। भालू के पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोट थी, जिसके चलते वह करीब डेढ़ महीने से तीन पैरों पर चल रहा था। शाम होते ही वह भोजन की तलाश में रानीमाई मंदिर और आसपास के गांवों में पहुंच जाता था। वन विभाग की टीम ने भालू को पकड़ने के लिए मंदिर के पास पिंजरा लगाया था। इसमें उसकी पसंद का गुड़ और नारियल रखा गया। खुशबू से आकर्षित होकर भालू पिंजरे में पहुंचा और वन अमले ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के बाद घायल भालू को उपचार के लिए रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया है।

होटल में घुसकर भजिया खाता, तेल भी पी जाता था

स्थानीय लोगों के मुताबिक, घायल भालू पिछले कई दिनों से खाने की तलाश में रानीमाई मंदिर और आसपास के इलाकों में घूम रहा था। रात के समय वह मंदिर के पास स्थित होटलों तक पहुंच जाता था और वहां रखा बचा हुआ खाना खा लेता था। बताया गया कि भालू कई बार होटल में रखी भजिया खा जाता था। एक बार उसने कड़ाही में रखा तेल भी पी लिया। इसके अलावा मंदिर परिसर के आसपास जलाए जाने वाले दीयों का तेल पीने की बात भी सामने आई। भालू के लगातार आबादी वाले इलाकों में पहुंचने से ग्रामीणों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में भी डर का माहौल बना हुआ था।

16 जुलाई को सामने आया था वीडियो

इस घायल भालू की मौजूदगी पहली बार 16 जुलाई 2026 को सामने आई थी। उस समय भालू के सड़क पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में भालू पिछले पैर में चोट के कारण लंगड़ाते हुए सड़क पार करता दिखाई दे रहा था। इसके बाद वन विभाग ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी थी।

पैरों के निशान से ट्रैक कर रहा था वन विभाग

वन विभाग की टीम लगातार भालू की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। उसके पैरों के निशान, आने-जाने के रास्ते और शाम के समय उसकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा था। निगरानी के दौरान वन विभाग को पता चला कि भालू अक्सर शाम के बाद रानीमाई मंदिर की ओर पहुंचता है। इसी आधार पर उसे सुरक्षित पकड़ने की योजना तैयार की गई। मंदिर के पास उपयुक्त स्थान पर पिंजरा लगाया गया और उसमें गुड़ व नारियल रखा गया। रात में भोजन की तलाश में पहुंचा भालू पिंजरे में दाखिल हुआ और उसमें फंस गया। वन अमले ने तत्काल उसे सुरक्षित तरीके से कब्जे में ले लिया।

इलाज के लिए भेजा गया जंगल सफारी

रेस्क्यू के बाद भालू को पिंजरे में सुरक्षित रखा गया और रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया है। वहां वन्यजीव विशेषज्ञ उसकी स्वास्थ्य जांच करेंगे और पिछले पैर में लगी चोट का उपचार किया जाएगा। वन विभाग के मुताबिक, उपचार के बाद भालू की स्थिति और स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

बालोद में लगातार सामने आ रही भालुओं की मौजूदगी

बालोद जिले में पिछले कुछ समय से अलग-अलग इलाकों में भालुओं की मौजूदगी की घटनाएं सामने आती रही हैं। डौंडी, दल्लीराजहरा और बालोद वन परिक्षेत्र के साथ ही गुरुर के सियादेवी और नारागांव क्षेत्र में भी भालू देखे जाने की सूचनाएं मिल चुकी हैं। दल्लीराजहरा के माइंस क्षेत्र के वार्ड-1 और 2 तथा राजहरा बाबा क्षेत्र में भी भालू की गतिविधियां सामने आई हैं। कुछ समय पहले जिला अस्पताल परिसर में भी देर रात भालू के घूमने की सूचना मिली थी। इसके अलावा पर्यावरण पार्क और तांदुला बांध के आसपास भी भालू देखे जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में वन विभाग के सामने वन्यजीवों की निगरानी के साथ-साथ आबादी वाले इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की चुनौती भी बनी हुई है। वन विभाग की अपील है कि आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीव दिखाई देने पर लोग उनके करीब जाने या उन्हें खाना खिलाने की कोशिश न करें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

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