दुर्ग जिले के 1.06 लाख किसानों को आज 407 करोड़ की धान के अंतर की राशि जारी होगी,,पाटन में सांसद बघेल तो दुर्ग में विधायक ललित चंद्राकर होंगे कार्यक्रम में शामिल

दुर्ग। कृषक उन्नति योजना के तहत पंजीकृत धान एवं धान बीज उत्पादक किसानों को आदान सहायता राशि आज सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दोपहर 12.30 बजे बिलासपुर जिले के विकासखंड बिल्हा से बटन दबाकर राज्य के 24.28 लाख किसानों के खातों में कुल 10,324.84 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करेंगे। दुर्ग जिले में इस योजना के तहत 1,06,830 किसानों को कुल 407.89 करोड़ रुपए की राशि मिलेगी। जिला प्रशासन के अनुसार, दुर्ग, पाटन और धमधा—तीनों विकासखंडों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें करीब 1000 किसानों की उपस्थिति रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान किसानों से वर्चुअल संवाद भी करेंगे।

विकासखंड स्तर पर कार्यक्रम

दुर्ग विकासखंड में कार्यक्रम विवेकानंद सभागार पद्मनाभपुर में होगा। पाटन में डॉ. खूबचंद बघेल भवन और धमधा में मंगल भवन बानबरद (अहिवारा) में आयोजन किया जाएगा। पाटन में लोकसभा दुर्ग सांसद विजय बघेल, दुर्ग विकासखंड में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक दुर्ग ग्रामीण ललित चंद्राकर, तथा धमधा में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक अहिवारा डोमनलाल कोर्सेवाड़ा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

पाटन में सर्वाधिक किसानों को लाभ

विकासखंडवार राशि का वितरण इस प्रकार है—

  • दुर्ग विकासखंड: 25,057 किसानों को 87.03 करोड़ रुपए
  • पाटन: 44,122 किसानों को 169.95 करोड़ रुपए
  • धमधा: 37,651 किसानों को 150.90 करोड़ रुपए

खरीफ 2025 में उपार्जित धान पर किसानों को प्रति क्विंटल अंतर की राशि दी जाएगी। कॉमन धान पर 731 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से अधिकतम 15,351 रुपए प्रति एकड़ तक और ग्रेड-ए धान पर 711 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से अधिकतम 14,931 रुपए प्रति एकड़ तक सहायता प्रदान की जाएगी।

फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन

सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाया है। जो किसान धान की जगह दलहन, तिलहन, मक्का या कपास जैसी दूसरी फसलें लगाएंगे, उन्हें 11,000 रुपए प्रति एकड़ तक की सहायता राशि दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को नई फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। राज्य सरकार का कहना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है और किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे कृषि निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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