110 आवारा मवेशियों के साथ कलेक्टोरेट पहुंचे 40 किसान, बोले- फसल बचाने की गुहार लेकर आए हैं

110 आवारा मवेशियों के साथ कलेक्टोरेट पहुंचे 40 किसान, बोले- फसल बचाने की गुहार लेकर आए हैं

अंबिकापुर/रायपुर। आवारा मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान किसानों ने गुरुवार को अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। परसाभकुरा और आसपास के गांवों के करीब 40 किसान 110 से अधिक मवेशियों को 15 किलोमीटर दूर से हांकते हुए सीधे सरगुजा कलेक्टोरेट पहुंच गए और कलेक्टर कार्यालय के बाहर खड़ा कर दिया। अचानक इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों के पहुंचने से कलेक्टोरेट परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। दोपहर करीब 12 बजे हुए इस घटनाक्रम से अधिकारी भी हैरान रह गए। ग्रामीणों का कहना था कि वे महीनों से आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। मजबूरी में उन्हें अपनी समस्या को सीधे प्रशासन के दरवाजे तक लाना पड़ा। कई घंटे तक प्रशासनिक अधिकारी किसानों को समझाने में जुटे रहे। किसानों ने कहा कि धान की फसल अभी तैयार भी नहीं हुई है और मवेशी खेतों में घुसकर फसल को बर्बाद कर रहे हैं।

‘खेती ही हमारी रोजी-रोटी’

कलेक्टोरेट पहुंचे किसानों के साथ मौजूद भकुरा के पूर्व सरपंच मनोज सिंह ने बताया कि छोटे किसान खेतों की घेराबंदी कराने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारी रोजी-रोटी सिर्फ खेती है। अगर आवारा मवेशी फसल खा जाएंगे तो परिवार कैसे चलेगा? किसान अपने मवेशी बांधकर रखते हैं, लेकिन बाहर से छोड़े गए पशु गांवों में घूमते रहते हैं और खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप

किसानों ने नगर निगम पर शहर के मवेशियों को गांवों में छोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण इलाकों में आवारा पशुओं की संख्या बढ़ गई है और खेती करना मुश्किल हो गया है। हालांकि नगर निगम के पशु विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शहर के मवेशियों को गांवों में छोड़ने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

कलेक्टर ने दिए समाधान के निर्देश

मामले की जानकारी मिलने पर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने किसानों से चर्चा की और अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा, “किसानों की समस्या गंभीर है। इसके स्थायी समाधान के लिए प्लानिंग की जा रही है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।” कलेक्टर की समझाइश के बाद किसानों का आक्रोश शांत हुआ और वे मवेशियों को वापस लेकर गांव लौट गए।


धमतरी में तेज रफ्तार वाहन ने 5 मवेशियों को रौंदा

इधर धमतरी जिले में नेशनल हाईवे-30 पर खपरी-अर्जुनी बाइपास के पास बुधवार देर रात एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर बैठे 5 मवेशियों को टक्कर मार दी। हादसे में 4 मवेशियों की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका पैर टूट गया। घटना के बाद हाईवे पेट्रोलिंग टीम ने मृत मवेशियों को सड़क से हटवाकर डिवाइडर पर रखवाया और गुरुवार सुबह जेसीबी की मदद से उन्हें दफनाया गया। मृत मवेशी अर्जुनी निवासी छबिकांत सिन्हा, जेठूराम सिन्हा और अन्य किसानों के बताए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद बना खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबलपुर-श्यामतराई बाइपास के करीब 11 किलोमीटर लंबे हिस्से में मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है, जबकि हाईकोर्ट सड़क सुरक्षा को लेकर पहले ही सख्त निर्देश दे चुका है। इससे तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। नेशनल हाईवे विभाग के अधिकारी आकाश अग्रवाल ने कहा कि धमतरी से कुरूद तक 24 घंटे पेट्रोलिंग टीम सक्रिय रहती है और सड़क से मवेशियों को हटाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी जुटाई जा रही है।


आवारा मवेशियों पर सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख गाइडलाइन

सड़क सुरक्षा और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं—

  • राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे और शहर की सड़कों से पशुओं को हटाना अनिवार्य।
  • संयुक्त अभियान चलाकर पशुओं को गौशालाओं और कैटल पाउंड में भेजा जाए।
  • 24×7 हाईवे पेट्रोलिंग टीम बनाकर नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
  • हर हाईवे पर स्थायी हेल्पलाइन नंबर लगाए जाएं।
  • आदेशों के पालन में लापरवाही पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
  • निर्धारित समय सीमा में पालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान और हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की समस्या को गंभीर प्रशासनिक चुनौती के रूप में सामने ला दिया है।

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