
मानपुर/बालाघाट। छह से नौ महीने में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर करीब 500 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। इस कथित डबल मनी रैकेट का जाल मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ था। मानपुर क्षेत्र के आम लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी इस नेटवर्क के झांसे में आ गए। बालाघाट पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटा है। पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई को चार वर्षों से फरार मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने समेत उसके सात साथियों तामेश मंसूरे, राकेश मंसूरे, प्रदीप कंकरायने, दिनेश कंकरायने, रामप्रसाद मंसूरे, प्रद्युम्न कंकरायने और रूखचंद हरदे को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में 63 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
एसआईटी प्रमुख एवं सीएसपी मयंक तिवारी ने बताया कि रिमांड के दौरान मुख्य आरोपियों के ठिकानों से 122 जमीनों की रजिस्ट्रियां बरामद हुई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 18.61 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा 14.82 करोड़ रुपए के 617 चेक, 20 रजिस्टर, भूमि ऋण पुस्तिकाएं, पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेज, लगभग 1500 कोरे चेक, 59 बैंक इंस्टा किट तथा टैक्स एवं जीएसटी से संबंधित रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि जब्त रजिस्टरों के आधार पर सभी निवेशकों की पहचान की जाएगी और उनकी सुनवाई कर कानूनी प्रक्रिया के तहत निवेश की गई राशि लौटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके लिए पुलिस विभाग जल्द ही विस्तृत प्रक्रिया प्रारंभ करेगा।
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2016-17 से लांजी क्षेत्र से संचालित यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लोगों को छह से नौ महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपए का निवेश कराता रहा। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी जमानत पर रिहा होकर फरार हो गए थे और लगातार ठिकाने बदलते रहे। एसआईटी की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस रैकेट के तार छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर और राजनांदगांव जिले तक जुड़े हुए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मोहला-मानपुर क्षेत्र के निवेशकों के लगभग 10 करोड़ रुपए भी इस कथित डबल मनी योजना में फंसे हुए हैं। अब स्थानीय निवेशकों की निगाहें एसआईटी की जांच और रकम वापसी की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
पुलिस जांच के अनुसार मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने ने शुरुआत अनाज व्यापार से की थी। बाद में वह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा और कथित निवेश योजनाओं के जरिए लोगों का विश्वास जीतकर बड़े स्तर पर रकम जुटाने लगा। रिश्तेदारों और परिचितों का पैसा दोगुना कर लौटाने के बाद उसने बड़ी संख्या में निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। देखते ही देखते वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह नेटवर्क 2019 तक 70 करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार तक पहुंच गया और बाद में इसका दायरा सैकड़ों करोड़ रुपए तक फैल गया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए मुख्य आरोपी लंबे समय तक विभिन्न धार्मिक स्थलों पर छिपता रहा। इस दौरान उसकी करोड़ों रुपए की संपत्तियां सीज कर दी गईं और जमीनों के पंजीयन पर रोक लगा दी गई। जांच के दौरान पुलिस ने रणनीति के तहत एक जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति दी, जिसके बाद आरोपी और उसके सहयोगियों ने टेलीग्राम ऐप के माध्यम से संपर्क और लेन-देन शुरू किया। यही डिजिटल गतिविधियां पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हुईं और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी स्वयं को हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए बताकर लोगों का विश्वास जीतता था, जबकि वह 12वीं पास और कॉलेज ड्रॉपआउट है। वह लोगों को विदेशों में संपत्ति में निवेश करने का दावा करता था, लग्जरी गाड़ियों और विदेशी यात्राओं का प्रदर्शन करता था, लेकिन जांच में पता चला कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं था। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस अंतरराज्यीय निवेश ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।