रायपुर-छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश में 5000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। यह ऐलान ‘सुशासन तिहार’ के समापन अवसर पर किया गया। उन्होंने कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “हम शिक्षकों की भर्ती करेंगे, यह यात्रा यहीं समाप्त नहीं होगी। सरकार को जनता के द्वार तक लेकर गए, जिससे लोगों को यह विश्वास हुआ कि उनकी सरकार हमेशा उनके लिए बेहतर काम करने में डटी हुई है।”
युक्तियुक्तकरण पर सियासी घमासान
इस घोषणा के बीच राज्य में युक्तियुक्तकरण को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सरकारी स्कूलों में चल रही इस प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की संख्या को छात्रों की संख्या के आधार पर पुनर्संयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इससे हजारों शिक्षकों के पद खत्म हो जाएंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि “प्रदेश में 10,463 स्कूलों में से बड़ी संख्या में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और शिक्षकों के 45,000 से अधिक पद समाप्त हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस निर्णय के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी।
सरकार का पक्ष: शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम
सरकार और भाजपा ने कांग्रेस के दावों को भ्रामक बताया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, “सिर्फ 166 स्कूलों को समायोजित किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों की संख्या 10 से कम है और पास में ही दूसरा स्कूल मौजूद है। बाकी 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।”
शिक्षा विभाग का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य स्कूल बंद करना नहीं, बल्कि संसाधनों का समुचित उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि “समायोजन” और “बंद” दो अलग बातें हैं।
शिक्षक संगठन भी सवालों में
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि “प्रदेश में शिक्षा विभाग के 63,695 पद रिक्त हैं, जिन्हें सीधी भर्ती और पदोन्नति से भरा जाना चाहिए।” उन्होंने 2008 के सेटअप को नजरअंदाज कर किए जा रहे समायोजन को गलत ठहराया।
निष्कर्ष
जहां एक ओर मुख्यमंत्री की ओर से 5000 शिक्षकों की भर्ती का ऐलान एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं युक्तियुक्तकरण को लेकर विपक्ष और शिक्षक संगठनों की चिंता सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और व्यापक होती है तथा युक्तियुक्तकरण से शिक्षा व्यवस्था को किस हद तक लाभ या हानि होती है।