YC न्यूज़ डेस्क। दैनिक भास्कर द्वारा ‘सिंदूर घर-घर’ रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने के बाद केंद्र सरकार और भास्कर समूह के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभागों की पीआर इकाइयों को भास्कर से जुड़े पत्रकारों को सभी आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स से हटाने का निर्देश दिया है। इस आदेश की शुरुआत रेलवे मंत्रालय ने की, जिसने तुरंत अपने मीडिया ग्रुप्स से भास्कर संवाददाताओं को बाहर कर दिया।
सूत्र बताते हैं कि सरकार अब केंद्रीय विज्ञापनों पर भी पुनर्विचार कर रही है और भास्कर को मिलने वाली विज्ञापन राशि को रोकने की योजना पर काम चल रहा है।
‘सिंदूर घर-घर’ पर क्यों नाराज़ है सरकार?
भास्कर की जिस रिपोर्ट को लेकर विवाद छिड़ा है, उसमें यह दिखाया गया था कि सरकारी मशीनरी का प्रयोग कर एक धार्मिक प्रतीक – सिंदूर – को घर-घर वितरित किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या यह कार्य सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है या किसी सांप्रदायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कवायद।
यह रिपोर्ट सरकार को बेहद नागवार गुजरी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इसे “मीडिया द्वारा फैलाई गई दुर्भावनापूर्ण रिपोर्टिंग” मान रही है और उसी के चलते अब भास्कर समूह को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम हो रहा है। मीडिया जगत में इस घटनाक्रम को प्रेस की आज़ादी पर एक और चोट माना जा रहा है। कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने इस पर चिंता जाहिर की है। हालांकि, दैनिक भास्कर समूह की तरफ से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।