
मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से किया गया सम्मानित
रायपुर, 2 अगस्त 2026। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को विवेक, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जनकल्याण में उपयोग करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो समाज के लिए स्थायी रूप से लाभकारी सिद्ध हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।
राज्यपाल शनिवार को रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। समारोह में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट तथा स्कूल ऑफ साइंस के कुल 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 28 को रजत पदक और 29 विद्यार्थियों को कांस्य पदक देकर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीकी बदलाव, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर है। ऐसे समय में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें ऐसे युवाओं का निर्माण करना होगा, जिनमें ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, अनुसंधान की प्रवृत्ति और सामाजिक सरोकार भी विकसित हों।
उन्होंने कहा कि शिक्षा की सच्ची सार्थकता केवल उपाधि प्राप्त करने में नहीं, बल्कि उस ज्ञान को दूरदर्शिता, समझदारी और नैतिक साहस के साथ जीवन में उतारने में है। ज्ञान तभी पूर्ण माना जाएगा, जब उसका उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा अपनी प्रतिभा, संस्कार और नवाचार की सोच के बल पर देश के विकास तथा समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। समारोह में जिंदल स्टील के चेयरमैन एवं सांसद नवीन जिंदल, विश्वविद्यालय की चांसलर शालू जिंदल, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल, जिंदल स्टील रायगढ़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देबोज्योति रॉय तथा कुलपति डॉ. आर.डी. पाटीदार सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।