“एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को मिला जनसमर्थन : धनोरा संगोष्ठी में उठी सशक्त आवाज

रिसाली। देश में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रिसाली के सन्मति पैलेस, धनोरा में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन श्री केसरी समिति रिसाली द्वारा किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता शताब्दी पांडे ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “बार-बार चुनावों से देश की विकास प्रक्रिया प्रभावित होती है, इसलिए अब समय आ गया है कि देश में एक साथ चुनाव की प्रणाली लागू की जाए। उन्होंने बताया कि विधि आयोग, नीति आयोग और संसदीय समिति ने भी इस विचार का समर्थन किया है। देश में अलग-अलग समय पर होने वाले लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय चुनावों के कारण आचार संहिता लग जाती है, जिससे विकास कार्य रुक जाते हैं। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रणाली लागू होने से अनुमानतः साढ़े चार लाख करोड़ रुपये की बचत होगी, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने अपने संबोधन में कहा कि इस विचार की नींव देश के महान विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रखी थी। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव से न केवल संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि प्रशासनिक अमला भी प्रभावित होता है। उन्होंने इसे लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दुर्ग भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कौशिक ने की। उन्होंने कहा कि “कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक भारत एक राष्ट्र है, तो फिर चुनाव भी एक साथ क्यों न हो?” उन्होंने संसाधनों की बचत और प्रशासनिक स्थिरता के लिए इसे आवश्यक बताया।

इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में सांसद प्रतिनिधि दीपक ‘पप्पू’ चंद्राकर, दीपक चोपड़ा, जिला पंचायत सदस्य श्रद्धा साहू, युवा समाजसेवी सोनुराम सिंह, दिनेश बाजपेयी, सलाखन सिंह, नगर पालिक निगम रिसाली के नेता प्रतिपक्ष शैलेन्द्र साहू, पूर्व जनपद अध्यक्ष चंद्रशेखर बंजारे, शीतला ठाकुर, अनुपम साहू, मनोज सोनी, रमेश साहू, और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना शकुंतला देवी ने प्रस्तुत की और स्वागत भाषण शैलेन्द्र ‘शेली’ ने दिया। संचालन अमृत देवांगन ने किया तथा आभार प्रदर्शन दिनेश बाजपेयी ने किया।

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