रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे युक्तियुक्तकरण सेटअप के विरोध में अब शिक्षक संगठन सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। छग शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने घोषणा की है कि 28 मई को राजधानी रायपुर में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा। उनका आरोप है कि विभाग युक्तियुक्तकरण की आड़ में शिक्षकों के पदों में कटौती कर रहा है, जिससे न केवल शिक्षकों के अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
वीरेंद्र दुबे ने बताया कि शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 को बहाना बनाकर विभाग वर्तमान सेटअप को अप्रासंगिक बता रहा है, जबकि RTE सिर्फ न्यूनतम मानदंड तय करता है, अधिकतम संसाधनों की व्यवस्था से नहीं रोकता। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शालाओं में जहां पहले 3 शिक्षक नियुक्त थे, अब उन्हें घटाकर 2 किया जा रहा है, और पूर्व माध्यमिक शालाओं में भी एक-एक शिक्षक कम किए जा रहे हैं।
संघ के प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने विभाग पर आरोप लगाया कि बिना किसी शिक्षक या पालक से चर्चा किए, एकतरफा निर्णय लेकर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न की गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल मंत्रालय में बैठकर नहीं चलाई जा सकती, इसमें समुदाय, शिक्षक और विद्यार्थियों की भी अहम भूमिका है।
प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ शिक्षा के मानकों में देश के 25वें से 30वें पायदान पर है, तो ऐसे में शिक्षकों की संख्या में कटौती कर गुणवत्ता कैसे बढ़ेगी? उन्होंने आशंका जताई कि यदि दो में से एक शिक्षक अवकाश या अन्य कारणों से अनुपस्थित होता है, तो विद्यालय एकल शिक्षकीय या शिक्षक विहीन हो जाएगा, जो बच्चों की सुरक्षा तक पर प्रश्नचिन्ह लगा देगा।
संयुक्त मंच, जिसमें 23 शिक्षक संगठन शामिल हैं, ने अपील की है कि इस मंत्रालय घेराव में प्रदेश के समस्त शिक्षक, शिक्षित बेरोजगार और पालक वर्ग सक्रिय रूप से भाग लें। संगठन की मांग है कि 2008 के विभागीय सेटअप के अनुसार ही युक्तियुक्तकरण किया जाए और शिक्षा तथा शिक्षक हितों की अनदेखी बंद की जाए।