दुर्ग। पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध और तर्पण के साथ जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। दुर्ग में जन समर्पण सेवा संस्था पिछले 9 वर्षों से इसी सेवा परंपरा को नियमित रूप से आगे बढ़ा रही है। संस्था सालभर हर दिन 200 से ज्यादा जरूरतमंदों को नि:शुल्क भोजन कराती है। वहीं पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में परिवार सहित पहुंचकर जरूरतमंदों को अपने हाथों से भोजन परोसते हैं। संस्था के अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा के अनुसार, पिछले 9 वर्षों से 365 दिन बिना किसी दिन नागा किए जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। दुर्ग रेलवे स्टेशन के अलावा बस स्टैंड, चंडी चौक, तमेरपारा, लुचकी तालाब, पुराना बस स्टैंड, पोलसाय पारा और समृद्धि बाजार सहित अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले गरीब, असहाय, बेसहारा और वृद्ध लोगों तक भोजन पहुंचाया जाता है।
पितृपक्ष में परिवार खुद बनते हैं सेवा का हिस्सा
पितृपक्ष के दौरान सेवा का यह अभियान और खास हो जाता है। लोग अपने माता-पिता, बुजुर्गों और दिवंगत परिजनों की श्राद्ध तिथि पर संस्था से जुड़कर जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। कई परिवार खुद भोजन वितरण स्थल पर पहुंचते हैं और अपने हाथों से लोगों को भोजन परोसते हैं। इस दौरान चावल, दाल, सब्जी, पूड़ी, बड़ा, मिठाई और नमकीन सहित भोजन परोसा जा रहा है। सेवा संस्था का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक नियमित भोजन पहुंचाना है, ताकि सेवा केवल किसी एक दिन या पर्व तक सीमित न रहे।
जरूरतमंदों को भोजन के साथ जरूरी सामान भी
संस्था की ओर से इस पितृपक्ष में केवल भोजन ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों की दूसरी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इस दौरान दो दिव्यांग लोगों को बैसाखी वितरित की गई। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों के लिए साबुन, निरमा, तेल, बिस्किट सहित दैनिक उपयोग की सामग्री के किट भी वितरित किए जा रहे हैं। संस्था समय-समय पर दुर्ग-भिलाई के आश्रमों में भी पहुंचकर वहां रहने वाले लोगों के लिए एक महीने की जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराती है।
समाजसेवियों के सहयोग से चल रही सेवा
जन समर्पण सेवा संस्था के इस अभियान में समिति के सदस्यों और समाजसेवियों का सहयोग रहता है। संस्था से जुड़े आशीष मेश्राम, राजेंद्र ताम्रकार, सुजल शर्मा, संजय सेन, अख्तर यासनी, अर्जित शुक्ला, मृदुल गुप्ता, दद्दू ढीमर, हरीश ढीमर, शुभम सेन, सचिन, ईशान शर्मा, अंकेश पेशवानी, अनस खान और वंश पांडेय सेवा कार्य में योगदान दे रहे हैं। संस्था के अनुसार, भोजन वितरण का काम बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है।
गायत्री मंदिरों में नि:शुल्क श्राद्ध तर्पण
पितृपक्ष के दौरान दुर्ग-भिलाई अंचल में श्राद्ध और तर्पण के सामूहिक आयोजन भी किए जा रहे हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार के मार्गदर्शन में विभिन्न गायत्री शक्तिपीठों और प्रज्ञा संस्थानों में नि:शुल्क सामूहिक श्राद्ध तर्पण संस्कार कराया जा रहा है।
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-6 भिलाई, गायत्री प्रज्ञापीठ हुडको, गायत्री शक्तिपीठ कैंप-2 शारदा पारा पावर हाउस, गायत्री शक्तिपीठ इंदिरा चौक रामनगर, शिव गायत्री मंदिर रिसाली, साधना केंद्र रिसाली बस्ती, गायत्री शक्तिपीठ संतरा बाड़ी स्टेशन रोड दुर्ग, कासारीडीह दुर्ग, गायत्री मंदिर उम्दा रोड भिलाई-3 और खुर्सीपार सहित अंचल के विभिन्न केंद्रों में सामूहिक श्राद्ध तर्पण कराया जा रहा है। यहां लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए वैदिक विधि से श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं।
महिलाओं को भी तर्पण का अवसर
गायत्री परिवार के कार्यकर्ता मोहन के अनुसार, सामूहिक श्राद्ध तर्पण आयोजन का उद्देश्य लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना है। इन आयोजनों में महिलाओं को भी तर्पण करने का अवसर दिया जा रहा है। पितृपक्ष के दौरान एक ओर लोग धार्मिक विधि-विधान से अपने पूर्वजों का स्मरण कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंदों को भोजन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर सेवा को भी इसका हिस्सा बना रहे हैं। दुर्ग में चल रही ये पहलें पितरों की स्मृति को सामाजिक सेवा से जोड़ने का उदाहरण पेश कर रही हैं।