रायपुर | बीजापुर के नौ मरीजों में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद गंभीर संक्रमण फैलने से पूरे प्रदेश में चिंता बढ़ गई है। बुधवार को अम्बेडकर अस्पताल में रेफर किए गए इन सभी मरीजों का दोबारा ऑपरेशन किया गया। नेत्र विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी कारण वही हो सकता है— सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं का सब-स्टैंडर्ड होना।
◆डॉक्टरों ने पाया गंभीर संक्रमण: पोस्ट-ऑपरेटिव एंडोफ्थालमाइटिस
अस्पताल की नेत्र विशेषज्ञ डॉ. निधि पांडेय ने बताया कि बीजापुर से भेजे गए नौ मरीजों की आंखों की रोशनी सर्जरी के पहले हफ्ते तक ठीक थी। लेकिन दूसरे हफ्ते जब उन्हें मितानिन के जरिए फिर अस्पताल लाया गया, तो उनकी आंखों में पोस्ट-ऑपरेटिव एंडोफ्थालमाइटिस पाया गया—एक बेहद गंभीर संक्रमण। यह संक्रमण आंख के अंदरूनी हिस्से—विट्रियस और एक्वस ह्यूमर—में बैक्टीरिया या फंगस के प्रवेश से होता है। डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर यह तभी होता है जब सर्जरी में उपयोग की गई दवाएं या उपकरण संक्रमित हों।एक साथ नौ मरीजों में संक्रमण मिलना बेहद आश्चर्यजनक और चिंताजनक है।
◆ एक मरीज की पुतली गल गई, तुरंत किया गया प्रत्यारोपण
डॉ. पांडेय ने बताया कि एक मरीज की आंख में संक्रमण इतना फैल गया था कि उसकी पुतली ही गल गई।
अम्बेडकर अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसका कार्निया ट्रांसप्लांट किया। छह मरीजों की विट्रेक्टोमी सर्जरी की गई, जबकि एक मरीज की आंख फिलहाल सुरक्षित है और उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। सभी नौ मरीजों को इंट्राविट्रियल इंजेक्शन दिए गए हैं।
◆ स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच समिति
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो यह पता लगाएगी कि संक्रमण का कारण दवाएं थीं या सर्जिकल प्रोटोकॉल में कोई चूक। हालांकि विशेषज्ञों का झुकाव इस ओर है कि दवाएं फिर जिम्मेदार हो सकती हैं।
◆14 साल में 9वीं बार आंखों की रोशनी जाने की घटना – ‘सब-स्टैंडर्ड दवाओं’ का दोहराया पैटर्न
यह कोई पहली घटना नहीं है, पिछले 14 वर्षों में छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद 9 बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई।कवर्धा, बालोद, दुर्ग, बागबाहरा, राजनांदगांव और रायपुर—लगभग हर क्षेत्र में ऐसे हादसे हुए हैं।2011 से 2018 के बीच 141 मरीजों की एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी।
कोलकाता की ड्रग लेबोरेटरी की रिपोर्ट में इन मामलों में दवाएँ सब-स्टैंडर्ड पाई गईं।2022 और 2024 में भी इसी तरह की घटनाएँ दोहराईं गईं। बीजापुर की ताजा घटना भी उसी पैटर्न की तरफ इशारा कर रही है।