ढाई साल में विधानसभा में सबसे सक्रिय रहे अजय चंद्राकर,धरमलाल कौशिक और भावना बोहरा, 12,559 सवालों से सरकार को घेरा

ढाई साल में विधानसभा में सबसे सक्रिय रहे अजय चंद्राकर,धरमलाल कौशिक और भावना बोहरा, 12,559 सवालों से सरकार को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के फरवरी 2024 से जुलाई 2026 तक आयोजित आठ सत्रों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार से कुल 12,559 प्रश्न पूछे। आंकड़ों के अनुसार, प्रश्न पूछने के मामले में भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और भावना बोहरा सबसे आगे रहे। तीनों ने इस अवधि में 284-284 प्रश्न लगाए। विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक भोलाराम साहू ने भी 284 प्रश्न पूछकर बराबरी की। विधानसभा के आंकड़ों के मुताबिक विपक्ष ने कुल 7,870 प्रश्न लगाए, जबकि सत्ता पक्ष के विधायकों ने 4,689 सवाल पूछे। भाजपा के पुन्नूलाल मोहले ने 283, धर्मजीत सिंह ने 280 और सुशांत शुक्ला ने 271 प्रश्न पूछे। कांग्रेस की ओर से अंबिका मरकाम और दलेश्वर साहू ने 280-280, जबकि बालेश्वर साहू ने 279 प्रश्न लगाए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने ढाई वर्षों में 276 प्रश्न पूछे, जबकि शेषराज हरवंश ने 272 सवाल लगाए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसी अवधि के दौरान विधानसभा में 89 प्रश्न पूछे।

मानसून सत्र में 1,033 सवाल

हाल ही में संपन्न मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने कुल 1,033 प्रश्न लगाए। भाजपा से अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक, जबकि कांग्रेस से डॉ. चरणदास महंत, कवासी लखमा और उमेश पटेल ने सर्वाधिक 20-20 प्रश्न पूछे, जो नियमों के अनुसार प्रति सदस्य निर्धारित अधिकतम सीमा है।

इन मुद्दों पर सबसे ज्यादा हुई चर्चा

मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पहले दिन अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया, जबकि सरकार ने इसे राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताया। नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के सहयोग पर धन्यवाद प्रस्ताव भी सदन में आया, जिसमें विपक्ष ने हिस्सा नहीं लिया। इसे लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा।

नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने कार्रवाई को गरीब परिवारों के खिलाफ बताते हुए प्राकृतिक न्याय और संविधान के विपरीत बताया, जबकि राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने इसे पूरी तरह वैधानिक कार्रवाई करार दिया। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते हादसे, महतारी वंदन योजना, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार, राशन कार्ड, जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं और अन्य जनहित के मुद्दे भी पूरे सत्र में चर्चा का केंद्र बने रहे।

सात विधेयकों को मिली मंजूरी

मानसून सत्र के दौरान विधानसभा ने सात महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। इनमें छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन), भाड़ा नियंत्रण (संशोधन), निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन), मूल्य संवर्धित कर (संशोधन), माल एवं सेवा कर (संशोधन), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा (संशोधन) तथा छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 शामिल हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना पर सबसे अधिक सवाल

विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों में शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, भ्रष्टाचार एवं अनियमितता, कृषि एवं खाद्यान्न, सामाजिक कल्याण, पेंशन तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुख रहे। बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव और रायगढ़ जिलों से संबंधित विकास कार्यों, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और धान खरीदी जैसे मुद्दों पर सबसे अधिक प्रश्न पूछे गए। वहीं बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में मानव तस्करी, शिक्षकों और डॉक्टरों के रिक्त पद, बिजली, स्कूल भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं तथा कोरबा और जांजगीर-चांपा में फ्लाई ऐश प्रदूषण एवं खनन से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।

अविश्वास प्रस्ताव पर देर रात तक चली चर्चा

मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई, जो देर रात 2:40 बजे तक चली। लंबी बहस के बाद सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया।

नियम के तहत अधिकतम चार प्रश्न

छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली के नियम-31 के अनुसार किसी भी सदस्य के एक बैठक में अधिकतम चार प्रश्न ही स्वीकार किए जाते हैं। मानसून सत्र में पांच बैठकें होने के कारण एक विधायक अधिकतम 20 प्रश्न पूछ सकता था। इस सत्र में 36 विधायकों ने निर्धारित अधिकतम 20-20 प्रश्न पूछकर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

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