कैंसर मरीजों की मदद के नाम पर चंदा वसूली का आरोप: रायपुर में चौराहों पर डिब्बे लेकर खड़े लोग, दिल्ली का पता भी निकला संदिग्ध

रायपुर। कैंसर पीड़ितों की मदद के नाम पर रायपुर के चौक-चौराहों पर चंदा जुटाने वाली एक संस्था की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक मीडिया इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि ‘सोसायटी फॉर कैंसर एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ के नाम से चंदा एकत्र किया जा रहा है, लेकिन संस्था के दावों, चंदे के इस्तेमाल और दिल्ली स्थित कार्यालय के पते को लेकर कई विसंगतियां सामने आई हैं। संस्था के नाम से लगाए गए डोनेशन बॉक्स पर दावा किया गया है कि संगठन सरकार से मान्यता प्राप्त है। वहीं, जांच के दौरान संस्था की वेबसाइट और चंदा जुटाने वाले लोगों से मिली जानकारी के आधार पर संस्था के कामकाज की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।

चौराहों पर दिहाड़ी और सैलरी पर लोग खड़े करने का दावा

संस्था के संपर्क नंबर पर बात करने वाले जावेद नामक व्यक्ति ने खुद को संस्था का अध्यक्ष बताया। जांच में उससे बातचीत के दौरान कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि चौराहों पर लोगों को दो तरह से लगाया जाता है—दिहाड़ी और मासिक वेतन पर। बताया गया कि दिहाड़ी पर काम करने वालों को 300 से 400 रुपए प्रतिदिन, जबकि सैलरी पर काम करने वालों को करीब 15 हजार रुपए महीने दिए जाते हैं। चंदे में जमा रकम संस्था के पास जाने की बात कही गई। हालांकि, चंदे से वास्तव में कितने कैंसर मरीजों की मदद की गई और कितनी राशि इलाज पर खर्च हुई, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया।

कैंसर मरीज की रिपोर्ट भेजने पर मांगे गए कई दस्तावेज

जांच के दौरान एक कैंसर मरीज की मेडिकल रिपोर्ट संस्था के बताए संपर्क पर भेजकर आर्थिक मदद की जानकारी ली गई। इसके जवाब में कथित तौर पर 10 तरह के दस्तावेज मांगे गए। इनमें पुलिस थाने से पत्र और विधायक को दिए गए आवेदन जैसे दस्तावेज भी शामिल बताए गए। जब सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की तैयारी जताई गई तो बाद में कथित तौर पर अलग-अलग कारण बताते हुए मदद से इनकार कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद संस्था की ओर से मरीजों को सहायता देने की प्रक्रिया और पात्रता को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

वेबसाइट पर मदद पाने वालों की सूची नहीं

संस्था की वेबसाइट scrorg.com पर संगठन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और बैंक खाते समेत अन्य जानकारियां उपलब्ध होने का दावा किया गया है। लेकिन इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक वेबसाइट पर अब तक सहायता प्राप्त करने वाले कैंसर मरीजों की सूची या सहायता राशि का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। डोनेशन से मदद लेने के लिए कथित तौर पर जिन दस्तावेजों की मांग की जाती है, उनका स्पष्ट उल्लेख भी वेबसाइट पर नहीं मिलने की बात सामने आई है।

रायपुर के कई प्रमुख स्थानों पर चंदा कलेक्शन

रिपोर्ट के मुताबिक, संस्था के डोनेशन बॉक्स लेकर लोग रायपुर के कलेक्टोरेट, शंकर नगर, पंडरी, जयस्तंभ चौक, तेलीबांधा, डॉ. अंबेडकर अस्पताल और फाफाडीह चौक सहित कई स्थानों पर खड़े होते हैं। कलेक्टोरेट के पास मिले भारती और सुरेंद्र पांडे ने संस्था से जुड़े होने की बात कही। सुरेंद्र ने खुद को कैंसर मरीज बताते हुए कहा कि चंदे की राशि से उन्हें भी कुछ मदद मिलती है।

रोज 700-800 रुपए कलेक्शन का दावा

शास्त्री चौक पर मिले अजय पांडे नामक युवक ने खुद को संस्था का वालंटियर बताया। उसके मुताबिक, वह करीब तीन साल से संस्था से जुड़ा है और रोज शाम को 3 से 4 घंटे चौराहे पर खड़ा रहता है। उसने बताया कि उसे इसके बदले 300 से 400 रुपए प्रतिदिन मिलते हैं। अजय के अनुसार, एक दिन में करीब 700-800 रुपए और कभी-कभी इससे अधिक राशि भी डोनेशन के रूप में मिल जाती है। उसके मुताबिक, जमा रकम दिल्ली स्थित हेड ऑफिस भेजी जाती है।

दिल्ली के बताए पते पर कार्यालय नहीं मिला

डोनेशन कलेक्शन के लिए लगाए गए बोर्ड पर संस्था के कार्यालय का पता आरजेड-21 बी, अर्जुन पार्क, नजफगढ़, नई दिल्ली बताया गया है। जांच के दौरान इस पते पर करीब 100 गज का तीन मंजिला मकान मिला। वहां रहने वाले परिवार ने कथित तौर पर बताया कि संस्था के नाम पर कई लोग पता पूछने आते हैं और इससे वे परेशान हैं। परिवार के अनुसार वहां संस्था का कोई कार्यालय नहीं है। स्थानीय निवासी मोनू पांडे ने भी संस्था के कार्यालय की जानकारी होने से इनकार किया। उनके मुताबिक, वे कई वर्षों से इलाके में रह रहे हैं, लेकिन उन्होंने वहां ऐसी किसी संस्था का कार्यालय नहीं देखा।

चंदे की रकम और संस्था की गतिविधियों की जांच जरूरी

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के नाम पर चंदा जुटाने के मामले में संस्था की कानूनी मान्यता, पंजीयन, डोनेशन की रकम, बैंक लेनदेन और मरीजों को दी गई आर्थिक सहायता की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि संस्था के नाम पर बिना वास्तविक सहायता के लोगों से धन एकत्र किया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। वहीं, संस्था के प्रतिनिधियों का पक्ष और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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