
YC न्यूज़ डेस्क । आसमान और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए 31 मई की रात बेहद खास होने वाली है। इस दिन आकाश में “ब्लू मून” का दुर्लभ नजारा दिखाई देगा। खास बात यह है कि इस महीने की पहली पूर्णिमा 1 मई को हुई थी और अब 31 मई को दूसरी पूर्णिमा देखने को मिलेगी। एक ही कैलेंडर महीने में जब दो बार पूर्णिमा आती है, तो दूसरी पूर्णिमा को “ब्लू मून” कहा जाता है। हालांकि नाम सुनकर लोगों को लगता है कि इस रात चांद नीले रंग का दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं है। “ब्लू मून” का संबंध चांद के रंग से नहीं, बल्कि खगोलीय कैलेंडर और चंद्रमा की गति से जुड़ी विशेष स्थिति से होता है।
क्या होता है ब्लू मून?
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा को पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं। इसी कारण कई बार एक ही महीने में दो पूर्णिमा पड़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में दूसरी पूर्णिमा को “ब्लू मून” कहा जाता है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना मानी जाती है, जो कभी-कभार देखने को मिलती है।
वैज्ञानिकों का दूसरा नजरिया भी
खगोल विज्ञान में ब्लू मून को लेकर “सीजनल मेथड” भी माना जाता है। इसके अनुसार किसी मौसम में आने वाली चार पूर्णिमाओं में तीसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। इस वैज्ञानिक मानक के हिसाब से 31 मई को दिखाई देने वाला चांद तकनीकी रूप से ब्लू मून नहीं माना जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि “सीजनल ब्लू मून” देखने के लिए लोगों को 20 मई 2027 तक इंतजार करना होगा।
फोटोग्राफरों और स्काई लवर्स के लिए खास मौका
हालांकि 31 मई की पूर्णिमा खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए बेहद खास रहने वाली है। साफ मौसम होने पर रात के आसमान में चमकता पूर्ण चंद्रमा आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेगा। विशेषज्ञों ने लोगों को शहर की रोशनी से दूर खुले स्थानों पर जाकर इस नजारे का आनंद लेने की सलाह दी है।