
संस्कृति विभाग के शिविर में 80 प्रशिक्षार्थियों ने सीखी बोनसाई कला की अभिनव तकनीक, बेकार सामग्री से तैयार किए आकर्षक कलात्मक मॉडल
रायपुर, 12 जून 2026। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ इस वर्ष नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मकता के अनूठे संगम का साक्षी बना। शिविर में प्रतिभागियों को पारंपरिक कला विधाओं के साथ-साथ बोनसाई कला की ऐसी अभिनव तकनीक सिखाई गई, जिसमें सामान्यतः अनुपयोगी समझे जाने वाले सिपोरेक्स ब्लॉक्स और थर्माकोल के टुकड़ों को आकर्षक कलाकृतियों में बदला गया। प्रसिद्ध बोनसाई विशेषज्ञ डॉ. मनोज अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षार्थियों ने बेकार सामग्री से कलात्मक गमले, प्राकृतिक लैंडस्केप, पहाड़, चट्टानें और सजावटी संरचनाएं तैयार करना सीखा। इस प्रशिक्षण ने कला और पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा देते हुए प्रतिभागियों को अपशिष्ट सामग्री के रचनात्मक उपयोग के प्रति जागरूक किया।
लगभग 80 प्रशिक्षार्थियों ने इस विशेष प्रशिक्षण में भाग लिया। युवा कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कला प्रेमियों तक सभी ने उत्साहपूर्वक इस विधा को सीखा और अपनी कल्पनाशीलता को मूर्त रूप दिया। प्रशिक्षण के दौरान तैयार की गई कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र रहीं और दर्शकों ने भी इसकी सराहना की।
प्रशिक्षार्थियों का कहना है कि यह कला न केवल सौंदर्यबोध विकसित करती है, बल्कि कम लागत में घरों, बगीचों और सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक स्वरूप देने का अवसर भी प्रदान करती है। साथ ही यह स्वरोजगार और रचनात्मक उद्यमिता के नए रास्ते भी खोल सकती है।
गौरतलब है कि 25 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित ‘आकार-2026’ शिविर में चित्रकला, मूर्तिकला, लोक एवं जनजातीय कलाओं सहित कई विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर का समापन 9 जून को रंगारंग कार्यक्रम और कला प्रदर्शनी के साथ हुआ। बोनसाई कला के अंतर्गत सिपोरेक्स और थर्माकोल से कलात्मक संरचनाएं तैयार करने का प्रयोग इस वर्ष शिविर की सबसे चर्चित और सराहनीय गतिविधियों में शामिल रहा। संस्कृति विभाग की यह पहल युवाओं में रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि सृजनशीलता हो तो बेकार समझी जाने वाली वस्तुएं भी कला की अद्भुत कृतियों में बदल सकती हैं।