एक तरफ सुशासन का उत्सव,दूसरी ओर गांवों में सन्नाटा। छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने सरकारी कामकाज को ठप कर दिया है, जिससे ग्रामीण जनता भारी परेशानियों का सामना कर रही है…
दुर्ग। प्रदेश सरकार जहां एक ओर सुशासन तिहार के माध्यम से उपलब्धियों का गुणगान कर रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने गांवों में सरकारी तंत्र की हकीकत सामने ला दी है। बीते 17 मार्च से पंचायत सचिव एक सूत्रीय मांग शासकीयकरण की मांग को लेकर कामकाज छोड़कर आंदोलनरत हैं। इसके चलते मनरेगा मजदूरी, पेंशन आहरण,शौचालय निर्माण, पीएम आवास समेत पंचायतों से संचालित तमाम शासकीय योजनाएं ठप पड़ी हैं। ग्राम पंचायतों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा है। ग्रामीण नागरिक पेंशन, आय प्रमाण पत्र,जन्म-मृत्यु पंजीयन जैसे आवश्यक कार्यों के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद नवनिर्वाचित सरपंचों को भले ही दायित्व सौंपा गया हो, पर सचिवों के बगैर प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से जड़वत हो गया है।
◆20 अप्रैल से दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन-महेंद्र साहू
गत दिनों दुर्ग जिले के हड़ताली पंचायत सचिवों ने जिले में बड़ी रैली निकालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें ‘मोदी की गारंटी’ पूरी करने शासकीयकरण की मांग को दोहराया गया ! संघ के जिला अध्यक्ष महेन्द्र साहू एवं पाटन ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप चन्द्राकर ने बताया कि 20 अप्रैल को दिल्ली जंतर-मंतर में प्रदेश और जिले के प्रतिनिधि प्रदर्शन करेंगे, जिसमें प्रत्येक ब्लॉक से 10 पंचायत सचिव शामिल होंगे।
◆ काम पर लौटने के सरकारी फरमान अब तक बेअसर –
हालांकि राज्य सरकार द्वारा सचिवों के नियमितीकरण हेतु गठित कमेटी द्वारा वार्ता के प्रयास किए गए हैं, लेकिन सचिव अब तक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं सरकारी आश्वासनों के बावजूद सचिवों ने काम पर लौटने से इनकार कर दिया है काम पर लौटने के प्रशासनिक फरमान भी अब तक बेअसर साबित हुए हैं ! इससे गांवों में सरकारी कामकाज ठप होने से ग्रामीणों को पेंशन, मजदूरी भुगतान, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश भर में हालिया सम्पन्न राज्य सरकार के सुशासन तिहार और जमीनी स्तर पर पंचायत कार्यों के पूर्णतः ठप होने का यह विरोधाभास प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी और पंचायत सचिवों की मांगों को लेकर सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है, अब देखना होगा कि समाधान कब तक निकलता है।
पंचायत सचिवों की मांग भाजपा के घोषणा पर मोदी जी की गारंटी में है, जल्दी पूरा करना चाहिए