सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन का संकट: 80% तक कमी, डॉग बाइट पीड़ितों को अधूरा इलाज मिलने का खतरा

सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन का संकट: 80% तक कमी, डॉग बाइट पीड़ितों को अधूरा इलाज मिलने का खतरा

रायपुर। राजधानी Raipur समेत प्रदेशभर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोजाना डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जीवनरक्षक एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरत के मुकाबले केवल 15 से 20 प्रतिशत वैक्सीन ही उपलब्ध हो पा रही है। वैक्सीन की कमी के कारण मरीजों को समय पर पूरा उपचार नहीं मिल पा रहा। कई स्वास्थ्य केंद्रों में केवल पहला डोज लगाने के बाद आगे के डोज देने से मना किया जा रहा है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलने वाला एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है। एक डोज की कीमत 600 से 1200 रुपए तक पहुंच रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। दैनिक पड़ताल में कई स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि रेबीज वैक्सीन की लगातार मांग भेजी जा रही है, लेकिन पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही। अधिकारियों के अनुसार डिमांड भेजने के 15 से 20 दिन बाद सीमित मात्रा में स्टॉक पहुंचता है, जो जरूरत के मुकाबले बेहद कम होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज का इलाज अधूरा छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। डॉग बाइट के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन की पूरी श्रृंखला समय पर लगना जरूरी है, अन्यथा संक्रमण का खतरा बना रहता है। इधर, शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से कुत्तों के नियंत्रण के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग की है।

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