रायपुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्राचार्य पदोन्नति मामले की अंतिम सुनवाई माननीय उच्च न्यायालय में 9 जून को निर्धारित की गई थी। शासन के अधिवक्ता ने नए शिक्षा सत्र का हवाला देते हुए सुनवाई का आग्रह किया था, जिसे माननीय न्यायालय ने समझते हुए 9 जून की तारीख तय की थी, ताकि 16 जून से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र के पूर्व पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
हालांकि, इसी बीच माननीय उच्च न्यायालय ने ग्रीष्म अवकाश का नया शेड्यूल जारी करते हुए 2 जून से 28 जून तक कोर्ट अवकाश घोषित कर दिया है। इस कारण, 9 जून को तय की गई सुनवाई अब बाधित हो सकती है, जिससे नए शिक्षा सत्र के प्रारंभ में प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया अधर में लटक सकती है।
संजय शर्मा ने कहा कि लाखों छात्रों के व्यापक हित में शिक्षा विभाग और महाधिवक्ता कार्यालय (AG) को विशेष पहल करनी चाहिए कि न्यायालय का कार्य निष्पादन मई माह में ही हो जाए। यदि मई माह में सुनवाई कर ली जाती है तो प्रदेश की लगभग 3000 शालाओं को नए सत्र की शुरुआत से ही प्राचार्य मिल सकेंगे। इससे शालाओं की तैयारी, छात्रों की व्यवस्था, अध्ययन योजना आदि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ज्ञात हो कि पहले न्यायालय का अवकाश 12 मई से 6 जून तक था, जिसके पश्चात 9 जून की सुनवाई रखी गई थी। परंतु अब नए शेड्यूल के अनुसार 2 जून से 28 जून तक ग्रीष्म अवकाश रहेगा। यदि सुनवाई अवकाश के बाद होगी, तो 2025–26 का शिक्षा सत्र आरंभ हो चुका होगा, जहाँ शालाओं में तैयारी के लिए समय नहीं मिलेगा।
टीचर्स एसोसिएशन ने महाधिवक्ता कार्यालय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर यह आग्रह किया है कि सुनवाई की तारीख ग्रीष्म अवकाश के पूर्व ही तय की जाए ताकि छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें और नए सत्र में शालाओं की व्यवस्थाएँ सुदृढ़ रूप से संचालित हो सकें।