
दुर्ग। रिसाली नगर पालिका निगम एवं भिलाई नगर पालिका निगम के रिक्त वार्डों में प्रस्तावित उपचुनाव को लेकर उठे विवाद के बीच अब बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दुर्ग कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) ने संशोधित आदेश जारी करते हुए संबंधित वार्डों में प्रस्तावित उपचुनाव प्रक्रिया को प्रभाव शून्य घोषित कर दिया है। इसके साथ ही इन निर्वाचन क्षेत्रों में लागू आदर्श आचार संहिता भी समाप्त कर दी गई है।
जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग, नवा रायपुर द्वारा 9 मई 2026 को जारी पत्र के परिपालन में संशोधित अनुसूची लागू की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दुर्ग जिले के नगर पालिक निगम भिलाई एवं रिसाली से संबंधित उपचुनाव प्रक्रिया को निरस्त करते हुए आदर्श आचार संहिता का प्रभाव समाप्त किया जाता है। गौरतलब है कि इससे पहले जिला न्यायालय दुर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ चौबे ने राज्य निर्वाचन आयोग को आवेदन प्रस्तुत कर उपचुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई थी। आवेदन में तर्क दिया गया था कि रिसाली नगर निगम के वार्ड क्रमांक 2 एवं 39 तथा भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 1 का कार्यकाल आगामी नवंबर-दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे में केवल 4 से 5 माह के अल्प कार्यकाल के लिए चुनाव कराना शासन के धन और संसाधनों पर अनावश्यक बोझ होगा।
आवेदन में निर्वाचन प्रक्रिया में होने वाले खर्च — जैसे कर्मचारियों की नियुक्ति, सुरक्षा व्यवस्था, मतदान सामग्री और प्रशिक्षण — का हवाला देते हुए इसे वित्तीय अनुशासन और जनहित के विपरीत बताया गया था। अब निर्वाचन आयोग के फैसले को अधिवक्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों की बड़ी प्रशासनिक स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अल्प कार्यकाल वाले निकायों में उपचुनाव को लेकर भविष्य में भी आयोग व्यावहारिक और वित्तीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दे सकता है।