जगदलपुर। बस्तर पंडुम 2026 के आगाज के साथ ही जगदलपुर का लालबाग मैदान देश की विविध लोक-संस्कृतियों के महासंगम में तब्दील हो गया। तीन दिवसीय इस महोत्सव के पहले दिन अंतरराज्यीय जनजातीय नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। मंच पर अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला के जरिए भारत की सांस्कृतिक खुशबू बिखेर दी। पहले दिन की सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह से अन्य राज्यों से आए जनजातीय दलों के नाम रही। मध्यप्रदेश के कलाकारों ने जैसे ही ‘गुदुम बाजा नाच’ की थाप छेड़ी, पूरा मैदान तालियों और उत्साह से गूंज उठा। वहीं आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध ‘डिमसा नृत्य’ की लयबद्ध चाल और सामूहिक तालमेल ने दर्शकों को जनजातीय जीवन की झलक दिखाते हुए एक अलग ही अनुभव कराया।
तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
इसके बाद तेलंगाना के ‘लम्बाड़ी’ और कर्नाटक के ‘बंजारा’ नृत्य ने रंग-बिरंगी वेशभूषा, पारंपरिक आभूषणों और जीवंत भाव-भंगिमाओं से लालबाग मैदान को जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों में बंजारा समुदाय की जीवनशैली, उल्लास और परंपराएं साफ झलकती नजर आईं। महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने ‘लिंगो नाच’ के माध्यम से अपनी प्राचीन परंपरा, आस्था और लोककला का प्रभावशाली संगम प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि भाषा और क्षेत्र भले अलग हों, लेकिन सुर, ताल और भावनाओं की भाषा एक होती है। पहले दिन उमड़ी भारी भीड़ और दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया ने बस्तर पंडुम 2026 की शुरुआत को यादगार बना दिया है। अब आने वाले दो दिनों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।