भिलाई की प्रतिभा बंसोड़ ने रचा इतिहास, नई ट्रेन चलाने में लगाई हैट्रिक; SECR की पहली महिला लोको पायलट बनीं

भिलाई। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर जोन में भिलाई की प्रतिभा बंसोड़ ने एक अनूठी उपलब्धि हासिल की है। वह जोन की पहली महिला लोको पायलट बन गई हैं, जिन्हें तीन अलग-अलग अवसरों पर नई ट्रेनों के उद्घाटन के दौरान पहली बार ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी मिली। प्रतिभा ने गुदुम, भानुप्रतापपुर और अब रावघाट से उद्घाटित ट्रेन का संचालन कर यह उपलब्धि हासिल की है। प्रतिभा का यह सफर रेलवे में महिला सशक्तीकरण, आत्मविश्वास और समर्पण की मिसाल है। नई ट्रेन के संचालन के साथ उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड बनाया है।

गुदुम से शुरू हुआ ऐतिहासिक सफर

प्रतिभा बंसोड़ ने पहली बार 1 फरवरी 2016 को गुदुम स्टेशन से नई ट्रेन का संचालन किया था। उस समय यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित माना जाता था। ऐसे माहौल में ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी। प्रतिभा के मुताबिक, शुरुआत में मन में थोड़ी दुविधा जरूर थी, लेकिन कठिन प्रशिक्षण, रेलवे अधिकारियों के भरोसे और ट्रैक के दोनों ओर तैनात सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाई।

भानुप्रतापपुर में महिलाओं ने संभाली थी पूरी ट्रेन

14 अप्रैल 2018 को प्रतिभा बंसोड़ ने दूसरी बार भानुप्रतापपुर से उद्घाटित ट्रेन का संचालन किया। यह अवसर भी खास था, क्योंकि उस दिन ट्रेन के संचालन से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां महिलाओं ने संभाली थीं। स्टेशन मास्टर से लेकर गार्ड, लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और टिकट निरीक्षक तक पूरा स्टाफ महिलाओं का था। यह आयोजन रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी कार्यक्षमता का प्रतीक बना।

रावघाट से तीसरी बार ट्रेन चलाकर लगाई हैट्रिक

अब प्रतिभा ने तीसरी बार रावघाट स्टेशन से उद्घाटित ट्रेन का संचालन कर अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया है। रावघाट स्टेशन पर दोपहर 3:01 बजे दिल्ली से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रायपुर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और आयोजन स्थल से सांसद भोजराज नाग ने हरी झंडी दिखाई। हरी झंडी मिलते ही प्रतिभा ने हॉर्न बजाया और ट्रेन दुर्ग की ओर रवाना हो गई। इस यात्रा में उनके साथ सहायक लोको पायलट मनोज बंड भी मौजूद रहे।

अधिकारियों के भरोसे को बताया सफलता की वजह

प्रतिभा बंसोड़ ने अपने पिछले दस वर्षों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि तीनों अवसर उनके लिए यादगार रहे हैं। उन्होंने रावघाट से ट्रेन संचालन का अवसर मिलने का श्रेय अपने अधिकारियों के भरोसे, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण को दिया। उनकी यह उपलब्धि न केवल भिलाई, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। प्रतिभा की सफलता बताती है कि दृढ़ संकल्प, अनुभव और जिम्मेदारी के प्रति समर्पण से महिलाएं रेलवे जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।

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