
पर्यटन के साथ स्थानीय युवाओं और महिला समूहों को मिला रोजगार, एक माह में पौने तीन लाख रुपये से अधिक की आय
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी ने संचालन के पहले ही महीने में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना ली है। प्रकृति, वन्यजीव और रोमांच का अनूठा अनुभव देने वाली इस सफारी में एक माह के भीतर 480 से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिससे स्थानीय समुदाय को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिले हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप तथा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस पहल को पर्यटकों का शानदार प्रतिसाद मिल रहा है। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि 3 मई को सफारी का शुभारंभ किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से इसका संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिसे नवंबर से दोबारा शुरू किया जाएगा।
सिर्फ एक माह के संचालन के दौरान सफारी से पौने तीन लाख रुपये से अधिक की आय हुई। इसमें स्थानीय युवाओं ने वाहन चालक, गाइड और गेटकीपर के रूप में कार्य करते हुए 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आमदनी हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन से भी 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, जिससे महिला समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। भोरमदेव जंगल सफारी के साथ यहां का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सफारी के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भ्रमण किया, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिली है।
करीब 36 किलोमीटर लंबे सफारी मार्ग में पर्यटकों को भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, बार्किंग डियर, बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियों का प्राकृतिक वातावरण में दीदार करने का अवसर मिला। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सौंदर्य ने पर्यटकों को रोमांचक और यादगार अनुभव प्रदान किया। वन विभाग के अनुसार लगभग 352 वर्ग किलोमीटर में फैले भोरमदेव अभयारण्य में विकसित यह जंगल सफारी छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव और जैव विविधता को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।