रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सली एनकाउंटर, सरेंडर और नक्सल-वाद के मुद्दे को लेकर सियासी तकरार फिर भड़क गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भाजपा पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया है कि भाजपा सरकार के समय नक्सली सीधे मंत्री दफ्तरों और कार्यालयों तक वसूली (मनी वसूलने) के लिए आते थे।
• बघेल के आरोप — “नक्सली वसूली के लिए आते थे”
भूपेश बघेल का कहना है, “भाजपा नक्सलियों को पैसा देती थी। नक्सली एकात्म परिसर और मंत्रियों के दफ्तर तक आते थे वसूली के लिए।” उन्होंने कहा कि उनके पास पूर्व गृह मंत्री को नक्सलियों ने पैसे देने की 1 लाख रुपए की रसीद भी है।
बघेल ने आगे कहा कि कांग्रेस के पहले पंक्ति के कई नेता इस लड़ाई में शहीद हुए, लेकिन आज उन पर ही नक्सल-सहयोग का आरोप लगाया जा रहा है।
• भाजपा का पलटवार — “कांग्रेस है नक्सलियों का फूफा”
इस आरोप के बाद भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस तो नक्सलियों का फूफा है, इनका पूरा कुनबा एक ही गोतियार है।” उनके अनुसार, कांग्रेस नक्सल-सहयोगी रही है, और खुद वह गलतियों की शिकार रही है।
• विवाद का माहौल और नक्सली – राजनीति की जंग
इस बयानबाजी के बीच, हाल ही में पकड़े गए कुख्यात नक्सली हिड़मा के एनकाउंटर और उससे जुड़ी घटनाओं ने फिर से सियासी तापमान बढ़ा दिया है।नक्सल-संबंधों, सुरक्षा, वसूली के दावों — इन सभी मुद्दों ने राज्य में सुर्खियों में जगह बना ली है।
• क्या दिखाती है यह सियासत — सवाल या आरोप?
बघेल के आरोप यदि सच साबित हुए, तो यह राज्य में नक्सल-राजनीति के डरावने पहलू को उजागर करेगा।
दूसरी ओर, भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस नक्सल-सहयोगी रही है — जोकि लोकतंत्र, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है।आम नागरिक, सुरक्षा एजेंसियां और राजनीतिक दल — तीनों के बीच इस विवाद का असर व्यापक हो सकता है।