रायपुर। छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के संशोधन हेतु चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में पाए गए संदिग्ध और संभावित फर्जी प्रविष्टियों को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “मतदाता सूची की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।” उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि 2003 की मूल एसआईआर सूची में जिन व्यक्तियों या उनके परिजनों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, उनके नाम अचानक सूची में कैसे शामिल हुए, इसकी गहन जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि वैध रूप से वर्षों से निवास कर रहे व्यक्तियों के नाम या उनके परिवार के सदस्यों का 2003 के रिकॉर्ड में अवश्य होना चाहिए। यदि नहीं है, तो उनके मूल निवास, परिवारिक पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की सत्यता की विस्तृत जांच की जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर नियमित कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि यह पुनरीक्षण प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि “देश के संसाधनों पर देश के वैध नागरिकों का अधिकार है।” ऐसे में यदि किसी ने अवैध रूप से सूची में घुसपैठ की है, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया है या बिना किसी पारिवारिक संबंध के मतदाता पहचान बनाने का प्रयास किया है, तो उसके विरुद्ध विदेशी अधिनियम, अवैध प्रवासी अधिनियम सहित कठोर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाएगी और आवश्यक होने पर उन्हें जेल भेजने में भी कोई हिचक नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से अपील की कि एसआईआर एक पवित्र और आवश्यक प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को स्वच्छ, सटीक और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि वैध नागरिकों को इस प्रक्रिया से बिल्कुल डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें अपने बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म भरना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से ऑनलाइन सुविधा भी प्रदान की गई है, जिसका उपयोग विशेषकर युवा वर्ग को अवश्य करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि “केवल अवैध प्रवासी और घुसपैठियों को डरना चाहिए।” उन्होंने पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमाओं पर बड़ी संख्या में लोग वापस लौट रहे हैं, क्योंकि भारत अब घुसपैठियों को किसी भी प्रकार की छूट देने के मूड में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में दहशत या आतंक फैलाने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।