
YC न्यूज़ डेस्क । झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार रात मंत्रियों के साथ करीब चार घंटे चली बैठक के बाद इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक राज्य में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की CID जांच कराई जाएगी। JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र पिछले 24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे। कई छात्र लंबे समय से भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं को रद्द करने के साथ पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे थे।
चार घंटे की बैठक के बाद सरकार का फैसला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को मंत्रिमंडल के साथ करीब चार घंटे तक बैठक की। इसके बाद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 2014 से अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं की CID के जरिए जांच कराई जाएगी। इस फैसले के बाद परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ गई है। सफल अभ्यर्थियों ने सरकार से परीक्षा रद्द नहीं करने की अपील की थी। उनका कहना था कि यदि आंदोलन के दबाव में परीक्षा रद्द होती है तो उनकी मेहनत और भविष्य प्रभावित होगा।
24 दिन से जारी था छात्रों का आंदोलन
परीक्षा में कथित गड़बड़ी के विरोध में छात्र 24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे। कई छात्र पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। छात्र नेता रूपेश कुमार पाल ने कहा कि छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि मुख्यमंत्री के साथ सीधी बातचीत होने पर कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है।
JSSC कार्यालय पहुंची CID की टीम
JSSC-CGL मामले की जांच के बीच CID की टीम झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के कार्यालय भी पहुंची। टीम ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की जांच की। जांच का फोकस परीक्षा प्रक्रिया, अभ्यर्थियों से जुड़े रिकॉर्ड और कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेजों पर बताया जा रहा है। इससे पहले भी CID की टीम सचिव के आवास पर कार्रवाई कर चुकी है। वहीं, परीक्षा को लेकर करीब 120 अभ्यर्थियों के पश्चिम बंगाल के एक होटल में ठहरने का दावा भी सामने आया है। इस दावे की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी ने सीएम सोरेन को लिखी चिट्ठी
छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आंदोलन कर रहे छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार को छात्रों की शिकायतें सुनकर समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि युवाओं की चिंताओं को सुनना और इस संकट के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।
भाजपा ने राहुल गांधी के पत्र पर उठाए सवाल
राहुल गांधी के पत्र को लेकर भाजपा ने निशाना साधा। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि पत्र मुख्यमंत्री को सुझाव देने से अधिक निर्देश देने जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी छात्रों की समस्याओं को लेकर इतने चिंतित हैं तो वे खुद रांची जाकर आंदोलनकारी छात्रों से क्यों नहीं मिले। भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस और राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा पर साधा निशाना
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने छात्र आंदोलन को लेकर भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राज्य सरकार युवाओं के साथ खड़ी है और छात्रों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए ही समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
छात्रों ने CBI जांच की मांग रखी
आंदोलनकारी छात्र JSSC और JPSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग पर कायम हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि निष्पक्ष जांच होने पर ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। सरकार की ओर से अब 2014 से अब तक की परीक्षाओं की CID जांच कराने की घोषणा की गई है। हालांकि आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग पर अभी भी अपना रुख स्पष्ट रूप से बदलने को तैयार नहीं हैं। JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने और पुरानी परीक्षाओं की जांच के सरकार के फैसले के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर छात्रों की नजर है। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत को इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।