छत्तीसगढ़ के 192 नगरीय निकायों के सामने बड़ी चुनौती: अर्बन चैलेंज फंड में केंद्र देगा 25% राशि, बाकी 75% जुटाने में छूटेंगे पसीने

रायपुर | YC न्यूज़ डेस्क ! छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए केंद्र सरकार की एक लाख करोड़ रुपए की अर्बन चैलेंज फंड योजना महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है, लेकिन प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकायों की कमजोर आर्थिक स्थिति इस योजना का लाभ उठाने में बड़ी बाधा बन सकती है। योजना के तहत केंद्र सरकार स्वीकृत परियोजनाओं की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा देगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि संबंधित नगरीय निकायों को ऋण, बांड और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) जैसे माध्यमों से जुटानी होगी। प्रदेश के 192 नगरीय निकायों के लिए यह योजना विकास के नए रास्ते खोल सकती है। हालांकि, रायपुर नगर निगम को छोड़कर अन्य नगर निगमों और अधिकांश नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के सामने अपने संसाधनों से बड़ी राशि जुटाने की चुनौती है।

रायपुर को छोड़कर अधिकांश निकायों की आर्थिक स्थिति कमजोर

नगरीय निकायों की आर्थिक क्षमता का अंदाजा उनके राजस्व से लगाया जा सकता है। रायपुर नगर निगम का सालाना राजस्व करीब 300 करोड़ रुपए बताया गया है। निगम अपने राजस्व से कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन और सामान्य खर्चों की भरपाई कर लेता है। वहीं, बिलासपुर नगर निगम का पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्व करीब 131 करोड़ रुपए रहा। प्रदेश के अन्य नगर निगमों का राजस्व इससे भी कम बताया गया है। कई निकायों के लिए अपने राजस्व से नियमित वेतन और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए 75 प्रतिशत राशि जुटाना आसान नहीं होगा। बैंकों से ऋण लेने, बांड जारी करने और निजी निवेश आकर्षित करने के लिए निकायों को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करनी होगी।

ढाई साल से ग्रीन बांड लाने की कोशिश में रायपुर निगम

आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत मजबूत होने के बावजूद रायपुर नगर निगम पिछले ढाई साल से ग्रीन बांड जारी करने की प्रक्रिया में जुटा है। कार्यशाला में निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने बताया कि ग्रीन बांड के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने जल्द ही बांड जारी करने की बात कही। ग्रीन बांड के माध्यम से जुटाई गई राशि का उपयोग पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। रायपुर जैसे बड़े नगर निगम के लिए भी इस प्रक्रिया में लग रहा समय अन्य निकायों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है।

हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ हुए एमओयू

अर्बन चैलेंज फंड के प्रभावी क्रियान्वयन और नगरीय निकायों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के लिए कार्यशाला के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

  • हुडको और राज्य सरकार के बीच समझौता: योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवासन एवं शहरी विकास निगम (हुडको) से ऋण सहित अन्य वित्तीय मॉडलों के माध्यम से सहयोग लिया जा सकेगा।
  • सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ समझौता: राज्य सरकार को ई-बस संचालन और अन्य शहरी विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सलाह एवं सहयोग मिलेगा।

इन समझौतों से नगरीय निकायों को परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने और तकनीकी पहलुओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री साय बोले- शहरों के विकास के लिए तैयार करें गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नवा रायपुर में नगरीय प्रशासन विभाग और हुडको की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा कि छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सुनियोजित, समावेशी और टिकाऊ तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने नगरीय निकायों से गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों को निवेश, उद्योग, व्यापार और रोजगार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित छत्तीसगढ़ का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। शहरों में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान, बेहतर जल निकासी, पेयजल, सड़क, बिजली और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनानी होंगी।

अरुण साव ने कहा- निर्माण के साथ रखरखाव पर भी ध्यान दें

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड शहरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, परियोजनाएं तैयार करते समय केवल निर्माण पर ही नहीं, बल्कि उनके संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता पर भी ध्यान देना होगा। वहीं, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने नगरीय निकायों से बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से धन जुटाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, तेलंगाना नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव डॉ. टीके श्री देवी, सेप्ट यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता, विभागीय संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर और सुडा के सीईओ सुमित अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अब निकायों की वित्तीय क्षमता की होगी असली परीक्षा

अर्बन चैलेंज फंड से प्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और शहरी अधोसंरचना के विकास को गति मिल सकती है। लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए नगरीय निकायों को ऐसी परियोजनाएं तैयार करनी होंगी, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों और जिनके लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकें। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन नगरीय निकायों के पास नियमित खर्चों के लिए भी पर्याप्त राजस्व नहीं है, वे परियोजनाओं की लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा कैसे जुटाएंगे? इस योजना की सफलता काफी हद तक निकायों की वित्तीय क्षमता, बेहतर परियोजना नियोजन और निजी निवेश आकर्षित करने की योग्यता पर निर्भर करेगी।

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