बस्तर दशहरा में दर्दनाक हादसा: विजय रथ के पहिए के नीचे दबने से ग्रामीण की मौत, दूसरा घायल; हादसे के बाद भीड़ का हंगामा

जगदलपुर | YC न्यूज़ डेस्क ! छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में भीतर रैनी की पारंपरिक रस्म के दौरान बुधवार देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ को खींचते समय दो ग्रामीण उसके पहिए की चपेट में आ गए। हादसे में एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने हंगामा किया। स्थिति संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाकर हालात पर काबू पाया।

भीतर रैनी की रस्म के दौरान हुआ हादसा

बस्तर दशहरा की परंपरा के अनुसार भीतर रैनी विधान में विजय रथ को प्रतीकात्मक रूप से चोरी कर ले जाने की रस्म निभाई जाती है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए बुधवार देर रात किलेपाल परगना के 32 गांवों से आए दो हजार से अधिक ग्रामीण राजमहल परिसर में एकत्र हुए थे। पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीण आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ को खींचते हुए कुम्हड़ाकोट के जंगलों की ओर ले जा रहे थे। इसी दौरान सिरहासार भवन के पास भीड़ के बीच रथ का संतुलन बिगड़ गया और दो ग्रामीण उसके पहिए के नीचे आ गए। रथ का भारी पहिया दोनों के ऊपर से गुजर गया। हादसे में एक ग्रामीण की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे का पैर कुचल गया। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने किया हंगामा

हादसे के बाद ग्रामीणों ने आयोजन स्थल पर सुरक्षा और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने को लेकर नाराजगी जताई। देखते ही देखते मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अतिरिक्त बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस हादसे ने बस्तर दशहरा जैसे विशाल पारंपरिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे के बाद प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

घटना के बाद प्रशासन ने विजय रथ की परिक्रमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। रथ के आगे और पीछे 15-15 मीटर का क्षेत्र खाली रखा जाएगा, ताकि लोगों के रथ के बेहद करीब आने से होने वाले हादसों को रोका जा सके। इस क्षेत्र में पुलिसकर्मियों और स्वयंसेवकों की मानवीय श्रृंखला बनाई जाएगी। प्रशासन का जोर अब रथ खींचने की पारंपरिक रस्म को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित रखने पर है। बस्तर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा के बीच हुए इस दर्दनाक हादसे ने शोक का माहौल पैदा कर दिया है। अब आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

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