छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बड़ा बदलाव: 700 सहायक प्राध्यापकों की होगी भर्ती, नए प्राचार्यों की नियुक्ति और NEP का होगा विस्तार

छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में बड़ा बदलाव: 700 सहायक प्राध्यापकों की होगी भर्ती, नए प्राचार्यों की नियुक्ति और NEP का होगा विस्तार

रायपुर, 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में 700 सहायक प्राध्यापकों की सीधी भर्ती शुरू करने, रिक्त पदों को भरने, प्राचार्यों की पदोन्नति, अतिथि प्राध्यापकों की मांगों पर कार्रवाई तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के विस्तार समेत कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायक प्राध्यापकों के 700 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू की जाए। साथ ही विभाग के अन्य खाली पदों को भरने के लिए भी शासन को प्रस्ताव भेजने और CGPSC के माध्यम से होने वाली भर्ती की दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए।

उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 31 जुलाई 2026 तक स्नातक महाविद्यालयों में प्राचार्यों की पदोन्नति पूरी कर ली जाए, ताकि नए शिक्षा सत्र में कोई भी कॉलेज नियमित प्राचार्य के बिना न रहे। बैठक में प्राध्यापकों और कर्मचारियों से जुड़े कई लंबित मामलों पर भी निर्णय लिए गए। वर्ष 2019 से पहले के लंबित मामलों में सहायक प्राध्यापकों को वर्ष 1990 के नियमों के तहत पदोन्नति देने, वरिष्ठ एवं प्रवर श्रेणी वेतनमान की सूची जल्द जारी करने तथा अतिथि प्राध्यापकों की सेवा शर्तों में सुधार के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं सहायक ग्रेड-3 और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्तियां राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाएंगी।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालयों में “90 घंटे, 90 दिन” का विशेष अंग्रेजी संप्रेषण पाठ्यक्रम शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के संचार कौशल को बेहतर बनाकर उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
बैठक में वित्तीय पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी महाविद्यालय को बजट जारी करने से पहले प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य होगी तथा नए कॉलेजों के विकास के लिए बजट का समान और पारदर्शी आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत अब स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों को भी नई शिक्षा नीति के दायरे में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपर संचालक और प्राचार्य के पदों को अलग करने तथा प्राचार्यों के कार्यकाल का ऑडिट कराने का भी निर्णय लिया गया।

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