रायपुर । छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा घोषित प्राचार्य पदोन्नतियों पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शालेय शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति सूची में शामिल कुछ व्याख्याताओं ने अपनी प्रथम नियुक्ति तिथि छुपाकर गलत तरीके से सूची में स्थान प्राप्त किया है। संघ का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि वरिष्ठ और योग्य अभ्यर्थियों के हक को भी नुकसान पहुंचाती है। 917 व्याख्याताओं को प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया है, लेकिन आरोपों के बाद पूरा मामला विवादों में घिर गया है। संघ ने तत्काल प्रभाव से पदस्थापना रोकने, पूरे प्रकरण की जांच कराने और नियम विरुद्ध पदोन्नति रद्द करने की मांग की है।
दावा–आपत्ति मिलने के बाद DPI ने काउंसिलिंग प्रक्रिया रद्द कर दी है। पहले 17 से 21 नवंबर तक काउंसिलिंग प्रस्तावित थी, लेकिन गड़बड़ी की जानकारी के बाद उसे स्थगित कर दिया गया है। अब 17 से 19 नवंबर तक दावा–आपत्तियां ली जाएँगी। इसके बाद निराकरण होने पर ही काउंसिलिंग पुनः शुरू होगी।
DPI ने पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए उप संचालक बी.एल. देवांगन की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है, जिसमें —सहायक संचालक एच.सी. दिलावर,सहायक संचालक रामजी पाल,सहायक वर्ग-3 सूरज यादव,कृष्ण कुमार मेश्राम को सदस्य बनाया गया है। संघ का कहना है कि यदि नियुक्ति तिथि जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई है, तो यह पूरे चयन तंत्र पर सवाल खड़े करता है। मामला अब शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है, और सभी की नजरें आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।