
रायपुर | छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजे को लेकर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। अधिकारियों, भूमाफियाओं और जमीन मालिकों की मिलीभगत से जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर 100 करोड़ रुपए से अधिक का खेल कर डाला गया। जांच में सामने आया है कि एक-एक परिवार ने अपनी जमीन को 50 से 60 छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग नामों से मुआवजा लिया। इस पूरी प्रक्रिया में ऐसा तंत्र तैयार किया गया कि किसी को नुकसान नहीं हुआ, बल्कि सभी पक्षों ने जमकर फायदा उठाया। मामला अभनपुर और कुरुद ब्लॉक के कई गांवों से जुड़ा है। नायकबांधा, सातपारा, उरला, मुड़पार उर्फ भेलवाडीह, टोकरो, तर्रा, कोलर, सारखी सहित आसपास के क्षेत्रों में खसरों को कृत्रिम रूप से विभाजित कर मुआवजे का बंदरबांट किया गया।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई लोगों ने अपने परिजनों के नाम पर जमीन दर्ज कराकर करोड़ों रुपए का मुआवजा लिया। उदाहरण के तौर पर बनारसी लाल अग्रवाल ने अपने बेटे और बहुओं के नाम पर 34 खसरों से 22.81 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा प्राप्त किया। वहीं सत्यनारायण गांधी और उनके पुत्र ने 11 खसरों से 8 करोड़ से अधिक, जबकि छोटूराम ने अपने बेटों के नाम पर 13 खसरों से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा लिया। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस परियोजना की जानकारी मिलते ही कई बाहरी व्यापारियों ने संबंधित गांवों में जमीनें खरीद लीं और बाद में मुआवजे के जरिए भारी मुनाफा कमाया। इन क्षेत्रों में वास्तविक किसानों की तुलना में व्यापारियों की हिस्सेदारी अधिक पाई गई।
दस्तावेजों के अनुसार, जेपी पांडेय ने अपने और परिजनों के नाम पर 15 खसरों से 10 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा हासिल किया, जबकि सूबेलाल ने अपने परिवार के नाम पर 8 खसरों से 6.41 करोड़ रुपए लिए। इसी तरह अन्य कई लोगों ने भी छोटे-छोटे खंड बनाकर करोड़ों का लाभ उठाया। हाल ही में इस मामले में कई संदिग्धों के यहां छापेमारी भी की गई है, जिससे पूरे नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की बारीकी से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।