रायपुर | प्रदेश में प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के फैसले ने आबकारी व्यवस्था को झटका दे दिया है। बिना पर्याप्त तैयारी लागू की गई इस व्यवस्था के कारण बीते 15 दिनों में करीब 500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है, वहीं शराब की सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो गई है। आबकारी विभाग के निर्णय के बाद प्रदेश के लगभग सभी जिलों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की आपूर्ति बाधित हो गई है। मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं होने से महंगी अंग्रेजी शराब और बीयर की मांग में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रदेश में करीब 800 शराब दुकानों तक डिस्टिलरियों से सप्लाई होती है। 1 अप्रैल से पीईटी (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग के आदेश के बाद डिस्टिलर्स और बॉटलर्स के सामने अचानक नई व्यवस्था लागू करने की चुनौती खड़ी हो गई। प्लास्टिक बोतलों की कमी और तकनीकी तैयारियों के अभाव में उत्पादन और बॉटलिंग का काम करीब 10 दिनों तक ठप रहा।
इस दौरान दुकानों में उपलब्ध पुराना स्टॉक खत्म हो गया। 10 अप्रैल से उत्पादन दोबारा शुरू तो हुआ, लेकिन यह मांग के मुकाबले काफी कम है। वर्तमान में दुकानों को जरूरत का केवल एक-तिहाई स्टॉक मिल पा रहा है, जो कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है। स्थिति यह है कि रोजाना करीब 70 करोड़ रुपए की देसी और किफायती शराब की खपत वाले प्रदेश में शासन को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए तक का राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। शादी सीजन के चलते मांग और बढ़ने से संकट और गहरा गया है। बिलासपुर जैसे जिलों में हालात और गंभीर हैं, जहां रोजाना साढ़े 4 हजार पेटी की मांग के मुकाबले केवल 1 से 1.5 हजार पेटी ही उपलब्ध हो पा रही है। शाम होते-होते दुकानों में स्टॉक खत्म होने के कारण शटर बंद करना पड़ रहा है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भी सामने आया है। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण प्लास्टिक निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में 40 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्लास्टिक बोतलों के लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में डिस्टिलर्स और बॉटलर्स को खुद नए प्लांट लगाने पड़ रहे हैं, जिन पर प्रति यूनिट 7 से 8 करोड़ रुपए तक का खर्च आ रहा है। विवाद बढ़ने के बाद विभाग ने 31 मई तक फिर से कांच की बोतलों में बॉटलिंग की अनुमति दे दी है, ताकि व्यवस्था को संतुलित किया जा सके। वहीं, वाणिज्य, उद्योग एवं आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि नई व्यवस्था के कारण शुरुआती नुकसान हुआ है, लेकिन जल्द ही इसकी भरपाई कर ली जाएगी। उन्होंने दावा किया कि प्लास्टिक बोतलों के उपयोग से शराब में मिलावट पर रोक लगेगी और सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा। फिलहाल, प्रदेश में शराब सप्लाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विभाग और उद्योग दोनों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।