रायपुर, 8 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित ‘ग्रीन केव’ (Green Cave) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संवेदनशील वन क्षेत्र में कथित तौर पर बिना वैधानिक अनुमति स्थायी निर्माण किए जाने के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने मामले में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह मामला तब सामने आया जब वन्यजीव प्रेमी और अधिवक्ता ब्यास मुनि द्विवेदी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इको-टूरिज्म के नाम पर ग्रीन केव के प्रवेश द्वार पर स्थायी ‘वेलकम गेट’ और गुफा के भीतर सीमेंट-कंक्रीट की सीढ़ियों का निर्माण कराया, जबकि इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
❗ क्या हैं मुख्य आरोप?
शिकायत के अनुसार— प्रवेश द्वार पर बनाया गया गेट दिखने में लकड़ी जैसा, लेकिन वास्तव में कंक्रीट संरचना,गुफा के भीतर स्थायी सीमेंट-कंक्रीट सीढ़ियां,यह निर्माण वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के नियमों का उल्लंघन। इस कानून के तहत वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण के लिए केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य होती है।
💰 48 लाख से ज्यादा खर्च पर सवाल
मामले में वित्तीय पहलू भी सामने आया है।
कुल स्वीकृत राशि: 48.45 लाख रुपये
पहली किस्त: 14.72 लाख रुपये
दूसरी किस्त: 33.73 लाख रुपये
इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो यह वित्तीय अनियमितता का मामला भी बन सकता है।
📜 नियमों का हवाला
शिकायत में वन सलाहकार समिति के 2021 के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि—वन क्षेत्र में स्थायी निर्माण ‘गैर-वानिकी गतिविधि’ माना जाएगा,इसके लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। केवल अस्थायी इको-टूरिज्म संरचनाओं को छूट मिल सकती है
🏛️ केंद्र सरकार का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्रालय ने 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ सरकार के अपर मुख्य सचिव (वन) को पत्र लिखकर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।निर्देश दिए गए हैं कि—
निर्माण किन परिस्थितियों में हुआ
क्या अनुमति ली गई थी
नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं
यदि अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधितों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इसकी जानकारी मंत्रालय व शिकायतकर्ता दोनों को दी जाएगी।