महानदी जल विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल, तीन महीने में आएगी समाधान रिपोर्ट-दिल्ली में बड़ा बैठक, छत्तीसगढ़-ओडिशा ने दिए सकारात्मक संकेत

महानदी जल विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल, तीन महीने में आएगी समाधान रिपोर्ट-दिल्ली में बड़ा बैठक, छत्तीसगढ़-ओडिशा ने दिए सकारात्मक संकेत

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण सहमति बनी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में श्रमशक्ति भवन में आयोजित बैठक में दोनों राज्यों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विवाद के स्थायी समाधान पर जोर दिया। बैठक में तय किया गया कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) की अध्यक्षता में गठित समिति अगले तीन महीने के भीतर विवाद से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर समाधान संबंधी रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण को सौंपी जाएगी।

दोनों मुख्यमंत्रियों ने जताई समाधान की इच्छा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि महानदी दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल बंटवारे का व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया। अधिकारियों के अनुसार बैठक का माहौल सकारात्मक रहा और दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने पर सहमति जताई।

समिति करेगी तकनीकी और कानूनी परीक्षण

आधिकारिक जानकारी के अनुसार समिति नदी के जल प्रवाह, बैराजों और एनिकेट्स के निर्माण, जल उपयोग, सिंचाई आवश्यकताओं तथा पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके आधार पर तैयार रिपोर्ट न्यायाधिकरण को आगे की कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले से वर्षों से लंबित महानदी जल विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

महानदी: दोनों राज्यों की जीवनरेखा

महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की सिहावा पहाड़ियों से होता है। लगभग 900 किलोमीटर लंबी यह नदी छत्तीसगढ़ से पूर्व दिशा में बहते हुए ओडिशा पहुंचती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। नदी का मुख्य बेसिन छत्तीसगढ़ और ओडिशा में फैला है, जबकि इसकी प्रमुख सहायक नदियां — शिवनाथ, हंसदेव, ईब, जोंक और तेल — मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक विस्तारित हैं।

क्या है विवाद का मूल कारण?

ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने महानदी की ऊपरी धारा पर कई बैराज और एनिकेट्स बिना पर्याप्त सहमति के बनाए हैं, जिससे विशेषकर गर्मियों में नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है। ओडिशा का कहना है कि इसका असर हीराकुंड बांध के जलस्तर पर पड़ता है, जिससे सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और मत्स्य पालन प्रभावित होते हैं। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ इन आरोपों को अस्वीकार करता रहा है। राज्य का कहना है कि महानदी का लगभग 53 प्रतिशत कैचमेंट एरिया उसके क्षेत्र में आता है और वह अपने वैधानिक अधिकार के अनुसार ही जल का उपयोग कर रहा है। छत्तीसगढ़ का यह भी दावा है कि समस्या का एक कारण ओडिशा में जल प्रबंधन की चुनौतियां हैं।

स्थायी समाधान की बढ़ी उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्रीय जल आयोग की समिति समयबद्ध तरीके से तकनीकी और कानूनी आधार पर रिपोर्ट तैयार करती है, तो महानदी विवाद के समाधान की दिशा में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति साबित हो सकती है। दोनों राज्यों के सकारात्मक संकेतों से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि दशकों पुराना यह अंतरराज्यीय जल विवाद सहमति और वैज्ञानिक आधार पर सुलझाया जा सकेगा।

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