
रायपुर | राजधानी रायपुर के मंदिरहसौद स्थित पेट्रोलियम डिपो से निकलने वाले टैंकरों से पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि एथेनॉल की चोरी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले करीब एक वर्ष में इस तरह के 10 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अध्ययन में कई मामलों में एक ही परिवार के सदस्यों के नाम सामने आने से पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, धरसींवा, मंदिरहसौद, गुढ़ियारी, विधानसभा और उरला थाना क्षेत्रों में दर्ज कई मामलों में साव परिवार से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियां इन मामलों में टैंकर चालकों और अन्य लोगों की संभावित मिलीभगत की भी पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, अब तक पेट्रोलियम कंपनियों के किसी अधिकारी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
डिपो से निकलने के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल
मंदिरहसौद स्थित बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल के डिपो से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ईंधन टैंकर रवाना होते हैं। सूत्रों के अनुसार, कई टैंकरों की जीपीएस मॉनिटरिंग प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि सभी वाहनों में जीपीएस सक्रिय है या नहीं तथा उनके रूट की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जाती है। बताया जा रहा है कि डिपो से निकलने के बाद कुछ टैंकरों को हाईवे या ढाबों के आसपास रोककर विशेष उपकरणों की मदद से ईंधन निकाला जाता है। बाद में इसे ड्रमों में संग्रहित कर अवैध रूप से बाजार में बेचा जाता है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली की जांच कर रही हैं।
एथेनॉल चोरी के मामले भी आए सामने
पुलिस कार्रवाई में हाल के वर्षों में पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ एथेनॉल की अवैध निकासी और भंडारण के मामले भी सामने आए हैं। वर्ष 2023 में मंदिरहसौद क्षेत्र में की गई कार्रवाई में हजारों लीटर डीजल, पेट्रोल और कथित रूप से नकली डीजल के रूप में उपयोग किए जा रहे एथेनॉल की बरामदगी की गई थी।
सिलेंडरों से बची गैस की अवैध बिक्री का भी आरोप
जांच के दौरान घरेलू गैस सिलेंडरों में बची हुई गैस के अवैध संग्रह और बिक्री को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि सिलेंडरों से बची गैस को कैप्सूल टैंकरों में एकत्र कर बिना वैध दस्तावेजों के खुले बाजार में बेचा जाता है। इस गैस को कथित रूप से कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है।
पिछले वर्षों में कई बड़ी कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2013 में देवेंद्र नगर क्षेत्र से 42 हजार लीटर केरोसिन के साथ कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद बीरगांव, उरला और औद्योगिक क्षेत्रों में भी अवैध रूप से केरोसिन, डीजल और पेट्रोल की बिक्री के मामलों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2025 में विधानसभा क्षेत्र के बिलासपुर मार्ग पर हजारों लीटर अवैध ईंधन के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इसी वर्ष रिंग रोड नंबर-3 स्थित यार्ड नंबर-2 में छापेमारी के दौरान लगभग ₹44.30 लाख मूल्य का अवैध पेट्रोल-डीजल और एक टैंकर जब्त किया गया था। जून 2026 में सोनडोंगरी क्षेत्र में छापेमारी कर 14,100 लीटर अवैध ईंधन भी बरामद किया गया।
प्रशासन ने दिए सख्ती के संकेत
रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने कहा कि टैंकरों में जीपीएस सिस्टम लगाने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने के लिए पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आगामी बैठकों में इस विषय को प्रमुखता से उठाया जाएगा और कंपनियों को सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। वहीं, रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा ने बताया कि मंदिरहसौद क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। डिपो के आसपास नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है और किसी भी अवैध सिंडिकेट को सक्रिय नहीं होने दिया जाएगा।
जांच जारी
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि ईंधन चोरी से जुड़े मामलों की जांच लगातार जारी है। अधिकारियों का मानना है कि निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाकर तथा अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई कर इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।