
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में करोड़ों रुपये के स्क्रैप चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक केवल लौह स्क्रैप चोरी की बात सामने आ रही थी, लेकिन पुलिस की ताजा जांच में पता चला है कि संगठित गिरोह फ्लू डस्ट की आड़ में कोक और कोयला भी संयंत्र से बाहर निकाल रहा था। इस मामले में गिरफ्तार 16वें आरोपी की पूछताछ के बाद चोरी के नेटवर्क का नया एंगल सामने आया है, जिसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। दुर्ग पुलिस ने इस मामले में 22 वर्षीय हेमंत देवांगन निवासी ग्राम मोखा, जिला धमतरी को गिरफ्तार किया है। आरोपी हिमांशु ब्रदर्स कंपनी में लोडर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि गिरोह के सदस्य रात के समय फ्लू डस्ट की लोडिंग के दौरान लौह स्क्रैप के साथ-साथ कोक और कोयले को भी फ्लू डस्ट के नीचे छिपाकर हाईवा वाहनों के जरिए संयंत्र से बाहर भेजते थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले चार से पांच महीनों से इस गिरोह के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। उसकी जिम्मेदारी लोडिंग के दौरान चोरी के सामान को इस तरह छिपाने की थी कि जांच या परिवहन के दौरान किसी को उस पर संदेह न हो। पुलिस का कहना है कि आरोपी के बयान के बाद अब कोक और कोयला चोरी के पूरे नेटवर्क की भी गहन जांच की जा रही है। इस पूरे मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था, जब पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम अकलोरडीह स्थित खदानपारा में ए.के. ट्रेडर्स और हथखोज क्षेत्र के एक प्लॉट में बड़ी मात्रा में चोरी का लौह स्क्रैप रखा गया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों स्थानों पर छापेमारी की, जहां फ्लू डस्ट से भरे कई हाईवा और ट्रकों में लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री बरामद की गई। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों से भारी मात्रा में चोरी का लौह स्क्रैप भी जब्त किया गया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 250 टन लौह प्लेट, बीम कटिंग और अन्य स्क्रैप जब्त किया। साथ ही स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल किए जा रहे हाईवा, हाइड्रा, जेसीबी सहित अन्य मशीनों को भी जब्त कर लिया गया। पुलिस के अनुसार अब तक करीब 90 लाख रुपये मूल्य का लौह स्क्रैप बरामद किया जा चुका है, जबकि वाहनों और मशीनरी समेत कुल जब्त संपत्ति का मूल्य लगभग 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंका गया है। इस कार्रवाई में घटना में प्रयुक्त लोडर क्रमांक CG 07 CE 0249 भी जब्त किया गया है।
प्रारंभिक जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि गिरोह लंबे समय से सुनियोजित तरीके से फ्लू डस्ट के नीचे स्क्रैप, कोक और कोयला छिपाकर संयंत्र से बाहर भेज रहा था। बाद में इन सामग्रियों को अलग-अलग स्थानों पर संग्रहित कर बाजार में बेच दिया जाता था, जिससे गिरोह को लाखों रुपये का अवैध लाभ होता था। दुर्ग पुलिस ने बताया कि अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस संगठित चोरी के मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।