
बिलासपुर, 14 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच अब आर्थिक अनियमितताओं की विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपे जाने की तैयारी से मामले में नया मोड़ आ गया है। बिलासपुर पहुंचे पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आर्थिक गड़बड़ियों की विस्तृत जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। DGP के बयान के बाद अब मामले की जांच EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है।
मुआवजा योजना में फर्जीवाड़े का आरोप
सरकार की ओर से सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। आरोप है कि इसी योजना का कथित तौर पर गलत फायदा उठाने के लिए एक नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार किए। आरोपों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में हुई मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत के रूप में दर्ज कराकर सरकारी मुआवजे की राशि हासिल की गई। कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों को जानकारी दिए बिना मुआवजा राशि निकालने के आरोप भी सामने आए हैं।
431 मौतों का आंकड़ा बना जांच का बड़ा बिंदु
मामले में जशपुर और बिलासपुर के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जशपुर में पिछले तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज की गईं, जबकि बिलासपुर में 431 मौतें दर्ज कर करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा बांटे जाने की बात सामने आई है। इस मामले को बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था। इसके बाद मामला चर्चा में आया। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया था।
17 गिरफ्तारियों के बाद अब आर्थिक कड़ियों की तलाश
मामले की जांच के दौरान अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में कथित तौर पर ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ नाम से बताए जा रहे नेटवर्क की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों तथा पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। हालांकि, किसी भी आरोपी की वास्तविक भूमिका और संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
EOW की जांच हुई तो बैंक खातों से लेकर फर्जी दस्तावेज तक खंगाले जाएंगे
यदि जांच EOW को सौंपी जाती है, तो कथित घोटाले के आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों, मुआवजा राशि के प्रवाह, फर्जी दस्तावेज और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की गहराई से जांच हो सकती है। DGP के बयान के बाद अब निगाह इस बात पर है कि EOW को जांच सौंपने का प्रस्ताव कब मंजूर होता है और विशेषज्ञ एजेंसी की जांच में कथित मुआवजा फर्जीवाड़े से जुड़े कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल 17 गिरफ्तारियों और करोड़ों रुपये के कथित मुआवजा वितरण के बीच EOW जांच की संभावित एंट्री ने मामले को और गंभीर बना दिया है।