छत्तीसगढ़ के मस्जिद-मदरसों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के आयोजन का निर्देश, वक्फ बोर्ड का आदेश चर्चा में ! अध्यक्ष सलीम राज बोले वंदे मातरम नहीं गाने वाले चले जाए पाकिस्तान

छत्तीसगढ़ के मस्जिद-मदरसों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के आयोजन का निर्देश, वक्फ बोर्ड का आदेश चर्चा में ! अध्यक्ष सलीम राज बोले वंदे मातरम नहीं गाने वाले चले जाए पाकिस्तान

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड द्वारा प्रदेश की सभी मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, इमामबाड़ों और खानकाहों में राष्ट्रीय पर्व मनाने को लेकर जारी निर्देश ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी आदेश में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन तथा देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का अवसर है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी वक्फ संस्थानों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने को कहा गया है। वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 3,300 मस्जिदें संचालित हैं, जबकि 400 से 450 मदरसे सक्रिय हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में दरगाहें, इमामबाड़े और खानकाह भी हैं। आदेश में इन सभी स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और सामूहिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई है।

इस मुद्दे पर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि “भारत माता की भूमि में तिरंगे का मान-सम्मान और अभिमान हमारा प्रतीक है। जो तिरंगे का सम्मान नहीं करेंगे, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड के आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बीच अधिवक्ता विपिन अग्रवाल ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत का सार्वजनिक अपमान करना, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या असम्मान प्रदर्शित करना दंडनीय हो सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ राष्ट्रगीत नहीं गाना हर परिस्थिति में अपराध नहीं माना जाता; कानून मुख्य रूप से अपमानजनक व्यवहार और जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने जैसी गतिविधियों पर लागू होता है।

वक्फ बोर्ड के इस निर्देश को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। समर्थक इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर अलग-अलग संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं से चर्चा कर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी यह आदेश आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

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