दुर्ग/भिलाई | छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी पहचान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने शनिवार को दुर्ग में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर आदिवासी समाज को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने पहली बार प्रदेश को “असली आदिवासी मुख्यमंत्री” दिया है, जिससे आदिवासी समाज में नई चेतना जागृत हुई है।
◆“कांग्रेस ने खुद अपने मुख्यमंत्री को नकली आदिवासी बताया”
देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस कभी आदिवासियों का सम्मान नहीं कर पाई। उन्होंने आरोप लगाया— “कांग्रेस ने 2000 में खुद ही एक नेता को आदिवासी कहकर मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन 2018 में खुद उनके ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दस्तावेज पेश कर कहा कि वह नकली आदिवासी थे। कांग्रेस ने ही असली बताया और कांग्रेस ने ही नकली साबित कर दिया। ऐसा दोहरा चरित्र आदिवासी समाज भूलने वाला नहीं है।”
देवलाल ने कहा कि भाजपा का मुख्यमंत्री वास्तव में आदिवासी समाज से आता है और इसलिए समाज में पहली बार सम्मान और प्रतिनिधित्व की वास्तविक भावना पैदा हुई है।
◆धर्मांतरण कानून पर बोले—“जल्द आएगा सख्त कानून”
देवलाल ठाकुर ने कहा कि आदिवासी समाज अब धर्म परिवर्तन नहीं चाहता और अपनी परंपरा एवं संस्कृति की सुरक्षा के प्रति पहले से ज्यादा सजग हो चुका है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शीतकालीन सत्र में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा—“आदिवासी पहचान की सुरक्षा के लिए यह कानून बेहद जरूरी है।”
◆ “75 सालों तक आदिवासी नायकों को सम्मान नहीं मिला”
प्रवक्ता ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद 75 वर्षों तक कई आदिवासी नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारा है और वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा, गैन सिंह नायक, मांझी जैसे नायकों को पहली बार देशभर में पहचान और सम्मान मिला है।
कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए देवलाल देवलाल ठाकुर स्वयं 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर कैबिनेट मंत्री अनिला भेड़िया के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। उन्हें 21,360 वोट मिले थे और वे तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से दूरी बना ली और दो वर्ष पूर्व 24 जनवरी को भाजपा में शामिल हो गए। तब से वे लगातार कांग्रेस नेतृत्व पर हमलावर हैं। दुर्ग में दिए गए उनके बयान ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में आदिवासी पहचान और राजनीतिक सम्मान को लेकर बहस तेज कर दी है।