केंद्रीय गाइडलाइन पर प्रदेश के कई स्कूलों में ब्रेक : SMDC स्कूल समितियां भंग नहीं, नेताओं के करीबियों के पद बचाने का आरोप

केंद्रीय गाइडलाइन पर प्रदेश के कई स्कूलों में ब्रेक : SMDC स्कूल समितियां भंग नहीं, नेताओं के करीबियों के पद बचाने का आरोप

10 दिन की पड़ताल में खुलासा, 215 हाई-हायर सेकेंडरी स्कूलों में नई व्यवस्था लागू होने पर रोक

रायपुर, 9 अगस्त। केंद्र सरकार की 5 जून 2026 को जारी गाइडलाइन के अनुसार प्रदेश के हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में संचालित स्कूल प्रबंधन एवं विकास समितियां (एसएमडीसी) भंग कर उनकी जगह नई स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) गठित की जानी हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में इस प्रक्रिया पर अमल शुरू हो चुका है, लेकिन राजधानी रायपुर में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है। राजधानी के 215 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में समितियों के भंग न होने के पीछे राजनीतिक दबाव की चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि इन समितियों में सांसदों और विधायकों के मनोनीत प्रतिनिधि शामिल हैं और नई एसएमसी व्यवस्था लागू होने पर उनके पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। एक स्थानीय मीडिया संस्थान द्वारा की गई 10 दिन की पड़ताल में 20 स्कूलों का दौरा किया गया। जांच में सामने आया कि स्कूल शिक्षा सचिव के स्पष्ट निर्देश के बावजूद रायपुर में प्रक्रिया रोक दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सतीश नायक ने प्राचार्यों को वॉट्सएप संदेश भेजकर पुरानी समितियां भंग न करने और नई समितियां गठित न करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि यह केंद्रीय गाइडलाइन पूरे देश के लिए लागू है और नई समितियों का गठन करना अनिवार्य होगा। उन्होंने माना कि संरचना बदलने से शुरुआती दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन व्यवस्था लागू की जाएगी। वहीं डीईओ सतीश नायक का कहना है कि अभी केवल गाइडलाइन जारी हुई है, समिति भंग करने का अलग से आदेश नहीं आया है। उनके अनुसार इसमें संशोधन की संभावना है और आगामी आदेश तक पुरानी समितियां यथावत रहेंगी।

क्या बदलेगा नई व्यवस्था में

पुरानी एसएमडीसी व्यवस्था में सांसद, विधायक और अन्य नेताओं के प्रतिनिधियों को मनोनीत किया जाता था। निर्णय प्रक्रिया पर राजनीतिक प्रभाव रहने के आरोप भी लगते रहे हैं। नई एसएमसी व्यवस्था में केवल पालकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और पूर्व छात्रों को शामिल करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्कूल विकास योजना, अनुदान के उपयोग, मिड-डे मील, मरम्मत कार्यों और बच्चों की उपस्थिति की निगरानी सीधे अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के हाथों में देना है।

तीन आदेशों से बढ़ा विवाद

  • 5 जून 2026: केंद्र सरकार ने नई एसएमसी गाइडलाइन जारी की।
  • 12 जून 2026: स्कूल शिक्षा सचिव ने सभी कलेक्टरों और डीईओ को एसएमसी गठन के निर्देश भेजे।
  • इसके बाद: रायपुर डीईओ ने वॉट्सएप संदेश के माध्यम से प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी।

सूत्रों के अनुसार रायपुर के कई स्कूलों में प्राचार्यों ने नई गाइडलाइन के तहत एसएमसी गठन की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी और कुछ स्थानों पर पहली बैठक भी आयोजित हो चुकी थी। डीईओ का संदेश मिलने के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई, जिससे स्कूलों में भ्रम की स्थिति बन गई है।

राजनीतिक नियुक्तियों पर सवाल

जानकारी के मुताबिक रायपुर के 215 और प्रदेश के लगभग 5,000 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में सांसद-विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की व्यवस्था रही है। इन पदों का उपयोग लंबे समय से पार्टी कार्यकर्ताओं, पार्षदों और नेताओं के करीबियों के राजनीतिक समायोजन के रूप में किया जाता रहा है।

22 जुलाई 2024 के एक सरकारी पत्र का हवाला देते हुए यह भी कहा जा रहा है कि धरसींवा और तिल्दा क्षेत्र में एसएमडीसी अध्यक्षों और विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्तियां प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर कलेक्टर के माध्यम से की गई थीं। इससे समितियों में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को और बल मिला है। अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह केंद्रीय गाइडलाइन के अनुरूप रायपुर में भी नई एसएमसी व्यवस्था लागू करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी करती है या नहीं। शिक्षा विभाग के भीतर सचिव और जिला स्तर के निर्देशों में दिख रहा विरोधाभास प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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