दुर्ग। केंद्र सरकार की वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर विधायक प्रतिनिधि एवं जिला पंचायत दुर्ग के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस बजट को बेहद ही निराशाजनक बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व गुरु बनने के दावों की इस बजट ने कलई खोलकर रख दी है। अशोक साहू ने कहा कि वर्ष 2025–26 में न तो राजस्व में अपेक्षित वृद्धि हो सकी और न ही टैक्स वसूली को मजबूत किया जा सका। इसके बावजूद इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस धुंआधार बजट की बात की, उसमें धुंआ तो बहुत है, लेकिन धार बेहद पतली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक विकास, ग्रामीण विकास से लेकर शहरी विकास तक लगभग हर क्षेत्र में कटौती की गई है। फसल बीमा योजना, यूरिया सब्सिडी, गरीब कल्याण अन्न योजना और गरीबों की गैस योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में भी भारी कटौती कर दी गई है।
अशोक साहू ने कहा कि बजट में ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं में भी कटौती की गई है। यहां तक कि बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि तक घटा दी गई है, जो बेहद चिंताजनक है।उन्होंने कहा कि इस बजट में न तो बढ़ती महंगाई पर कोई ठोस उपाय नजर आता है और न ही बेरोजगारी पर काबू पाने की कोई स्पष्ट योजना। विदेशी घटनाक्रमों से बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को रोकने के लिए भी कोई संकल्प नहीं दिखता। अशोक साहू ने कहा कि यह बजट जनहित का नहीं बल्कि कटौती का बजट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मोदी जी अब काटने में लग गए हैं, बांट तो पहले ही कर रहे थे।” कुल मिलाकर यह बजट ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है।