रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे सम्मानपुर (नकटी) गांव में इन दिनों दहशत का माहौल है। वजह है – बुलडोजर ऐक्शन! प्रशासन ने गांव के 80 से अधिक परिवारों को बेदखली का नोटिस थमाया है। नोटिस मिलने के बाद से ही ग्रामीणों में गुस्सा और डर दोनों का मिला-जुला माहौल है। बीते 10 दिनों से स्थानीय ग्रामीण महिलाएं-बुजुर्ग-बच्चे सभी सड़क पर उतरकर प्रशासनिक फैसले का विरोध कर रहे हैं।
गांव वालों का आरोप है कि उनके पुरखों की ज़मीन पर विधायकों के लिए कॉलोनी बसाने की योजना बनाई जा रही है, और इसी योजना के तहत उन्हें जबरन हटाया जा रहा है। नोटिस में दी गई चेतावनी के मुताबिक जल्द ही प्रशासनिक अमला मौके पर कार्रवाई के लिए पहुंच सकता है
ग्रामीणों का फूटा ग़ुस्सा: “सालों से बसी बस्ती को उजाड़ा जा रहा”
स्थानीय लोगों ने कहा कि वे इस जमीन पर दशकों से बसे हुए हैं, और उनके पास नियमानुसार दस्तावेज, वोटर आईडी, बिजली कनेक्शन, राशन कार्ड जैसे प्रमाण भी हैं। इसके बावजूद सरकार उन्हें “अवैध कब्जाधारी” बताकर हटाने की साजिश रच रही है। कुछ महिलाओं ने रोते हुए कहा कि “हमारी झोपड़ी भले कच्ची हो, लेकिन जिंदगी की नींव यहीं रखी गई है। बुलडोजर से केवल घर नहीं टूटेगा, हमारा जीवन चकनाचूर होगा।”
“सत्ता के लिए ज़मीन, इंसानियत गई पीछे?” — सवाल उठाते ग्रामीण
विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई को “सत्ताधारी पार्टी का क्रूर चेहरा” बताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विधायकों को खुश करने के लिए गरीब परिवारों को उजाड़ रही है, जो कि तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
प्रशासन का पक्ष: “अवैध कब्जा हटाना ज़रूरी”
दूसरी ओर, प्रशासन ने साफ किया है कि जमीन पर अवैध अतिक्रमण हुआ है और राज्य स्तरीय योजना के तहत वहां आवासीय परियोजना प्रस्तावित है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को वैकल्पिक पुनर्वास का विकल्प दिया जा सकता है, लेकिन “कानून का पालन हर हाल में जरूरी है।”
क्या होगा आगे ?
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन भी फिलहाल सतर्क है। लेकिन कभी भी बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो सकती है, जिससे पूरे इलाके में तनाव और बढ़ सकता है। राजनीतिक हस्तक्षेप की भी संभावना जताई जा रही है।