CG हाईकोर्ट ने हर स्कूल की खाली सीटों का मांगा हिसाब,नए चीफ जस्टिस महापात्र ने पहले दिन 13 मामलों की सुनवाई की

CG हाईकोर्ट ने हर स्कूल की खाली सीटों का मांगा हिसाब,नए चीफ जस्टिस महापात्र ने पहले दिन 13 मामलों की सुनवाई की

RTE एडमिशन पर राज्य सरकार से तीन सप्ताह में हलफनामा तलब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के साथ डिवीजन बेंच में RTE से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से राज्य के प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत आरक्षित सीटों, प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों और खाली सीटों का पूरा विवरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

हर स्कूल का देना होगा पूरा डेटा

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को लागू करने के लिए वर्तमान में अपनाई जा रही प्रक्रिया की जानकारी दे। सरकार को यह भी बताना होगा कि RTE के प्रावधानों को लागू करने के लिए वर्तमान में कौन-सी SOP (Standard Operating Procedure) प्रभावी है। इसके साथ ही राज्य के प्रत्येक स्कूल का विस्तृत चार्ट पेश करना होगा। इसमें स्कूलवार RTE के तहत आरक्षित कुल सीटें, इनमें हुए प्रवेश और वर्तमान में रिक्त सीटों की संख्या का उल्लेख करना होगा।

सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर से पेश होगा हलफनामा

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत हलफनामा और जरूरी चार्ट राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। इससे अदालत को राज्य में RTE के वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा मिल सकेगा। राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील ने कोर्ट से अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि तब तक निर्देशों का पालन कर दिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख से सात दिन पहले हलफनामा पेश किया जाए और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए।

13 जनहित याचिकाओं पर चल रही सुनवाई

RTE के मुद्दे को लेकर सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दाखिल की हैं। इन याचिकाओं पर लगातार सुनवाई हो रही है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले दिन ही डिवीजन बेंच में इन मामलों की सुनवाई की। इस दौरान जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल भी उनके साथ रहे। डिवीजन बेंच ने RTE के तहत स्कूली बच्चों के प्रवेश से जुड़े मामले में राज्य सरकार से स्पष्ट और आंकड़ों पर आधारित जवाब मांगा है। अब सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार डेटा के आधार पर अगली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा तय होगी।

नए चीफ जस्टिस की पहली सुनवाई में शिक्षा का मुद्दा अहम

चीफ जस्टिस महापात्र की डिवीजन बेंच में पहले दिन करीब 13 मामलों की सुनवाई हुई। इनमें RTE से जुड़ी जनहित याचिकाएं भी शामिल रहीं। पहली ही सुनवाई में स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित और खाली सीटों का विस्तृत हिसाब मांगने के आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे राज्य में RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति और कानून के अनुपालन को लेकर तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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