
बिलासपुर, 9 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दिवंगत शिक्षाकर्मियों की दो विधवाओं को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दोनों महिलाओं के अनुकंपा नियुक्ति आवेदन निरस्त करने वाले प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दोनों महिलाओं की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के आधार पर उपयुक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने की। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु से आर्थिक संकट में आए उसके परिवार को राहत प्रदान करना है। ऐसे में पात्र आश्रित को केवल तकनीकी आधारों का हवाला देकर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।
2013 में पति की मौत, 2014 में किया था आवेदन
पहला मामला रायगढ़ जिले के लैलूंगा निवासी संध्या सिदार का है। उनके पति राधे लाल सिदार शिक्षक (पंचायत) के पद पर कार्यरत थे। 22 जून 2013 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद संध्या सिदार ने 25 मार्च 2014 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि, अधिकारियों ने 18 जुलाई 2014 को उनका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि चतुर्थ श्रेणी के भृत्य पद पर नियुक्ति को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। संध्या की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि राज्य सरकार ने 3 नवंबर 2011 को ‘शिक्षा कर्मी’ पदनाम को बदलकर ‘शिक्षक (पंचायत)’ कर दिया था, इसके बावजूद पुराने पदनाम के आधार पर उनका आवेदन खारिज किया गया।
दूसरी विधवा ने पूरी की शैक्षणिक शर्त, फिर भी नहीं मिली नियुक्ति
दूसरा मामला जशपुर जिले के पत्थलगांव की पुष्पावती सिदार का है। उनके पति तेश्वर सिंह सिदार शिक्षक (पंचायत) के पद पर कार्यरत थे और 6 जुलाई 2013 को सेवाकाल में उनका निधन हो गया था। पुष्पावती ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। उस समय वह 11वीं पास थीं। अधिकारियों ने उन्हें तीन वर्ष के भीतर 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त दी थी। पुष्पावती ने अधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए 12वीं की पढ़ाई पूरी कर ली। इसके बाद उनके सामने D.Ed./B.Ed. और TET जैसी शर्तें रखी गईं। उन्होंने चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति की इच्छा भी जताई, लेकिन इसके बावजूद 28 जून 2016 को उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया।
बार-बार नई शर्तें लगाना उचित नहीं
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि यदि किसी आश्रित को अधिकारियों के निर्देश पर अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए कहा जाता है और वह संबंधित शर्त पूरी कर देता है, तो बाद में नई-नई शर्तें लगाकर उसे नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति को महज तकनीकी प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसका उद्देश्य मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से उबारना और उसे आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
मृत कर्मचारी के समान पद पर नियुक्ति जरूरी नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का अर्थ यह नहीं है कि आश्रित को दिवंगत कर्मचारी के समान पद पर ही नियुक्त किया जाए। यदि आश्रित की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता और पात्रता किसी अन्य उपलब्ध पद के लिए उपयुक्त है, तो नियमों के अनुसार उस पद पर नियुक्ति दी जा सकती है।
दोनों निरस्तीकरण आदेश रद्द
कोर्ट ने संध्या सिदार के मामले में 18 जुलाई 2014 और पुष्पावती सिदार के मामले में 28 जून 2016 को जारी किए गए नियुक्ति निरस्तीकरण आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही संबंधित जिला पंचायत, जनपद पंचायत और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दोनों महिलाओं की वर्तमान शैक्षणिक योग्यता एवं पात्रता के आधार पर उपयुक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। हाईकोर्ट के इस फैसले से वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहीं दोनों महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता साफ हुआ है। फैसले में अदालत ने यह संदेश भी दिया कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में कल्याणकारी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पात्र आश्रितों को केवल तकनीकी आधारों के चलते राहत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।