CGMSC घोटाला: ‘हमर लैब’ योजना में 550 करोड़ का नुकसान, ACB/EOW ने 3 और आरोपियों को किया गिरफ्तार; 27 जनवरी तक रिमांड

रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा (ACB/EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस मामले में दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ताजा कार्रवाई से ‘हमर लैब’ योजना के तहत की गई खरीदी में हुई भारी अनियमितताओं की परतें और खुलती नजर आ रही हैं। ACB/EOW के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स के लाइजनर प्रिंस जैन शामिल हैं, जो मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के जीजा बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि इन तीनों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर CGMSC के टेंडर में हिस्सा लिया और मोक्षित कॉरपोरेशन को लाभ पहुंचाने के लिए आपसी मिलीभगत की। ब्यूरो ने बताया कि 18 जनवरी 2026 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। ACB/EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब’ योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है।
कार्टेल बनाकर टेंडर, एक जैसा पैटर्न
जांच के मुताबिक, ‘हमर लैब’ योजना के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में मोक्षित कॉरपोरेशन को फायदा पहुंचाने के लिए रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर टेंडर भरे। तीनों फर्मों द्वारा उत्पादों का विवरण, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स की जानकारी लगभग एक जैसी दी गई। दरें भी एक ही पैटर्न में कोट की गईं, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित कॉरपोरेशन ने और उसके बाद आरएमएस व श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भरीं। इस मिलीभगत के चलते मोक्षित कॉरपोरेशन ने CGMSC को MRP से तीन गुना तक ज्यादा कीमत पर सामग्री की आपूर्ति की, जिससे शासन को करीब 550 करोड़ रुपए का नुकसान होने का आकलन है।
411 करोड़ का कर्ज, 27 दिन में 750 करोड़ की खरीदी
जांच में यह भी सामने आया है कि CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों की सांठगांठ से सरकार को 411 करोड़ रुपए का कर्जदार बना दिया गया। IAS और IFS अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। आरोप है कि सिर्फ 27 दिनों में 750 करोड़ रुपए की खरीदी कर ली गई। इस केस में मोक्षित कॉरपोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा 23 जनवरी तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कस्टोडियल रिमांड पर हैं। जांच दस्तावेजों के अनुसार, CGMSC के अधिकारियों, मोक्षित कॉरपोरेशन, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, श्री शारदा इंडस्ट्रीज और सीबी कॉरपोरेशन ने 8 रुपए में मिलने वाली EDTA ट्यूब 2,352 रुपए में और 5 लाख रुपए की CBS मशीन 17 लाख रुपए में खरीदी। इसके अलावा 300 करोड़ रुपए के रिएजेंट्स भी खरीदे गए।
शिकायत से खुला घोटाले का राज
CGMSC घोटाले का खुलासा दिसंबर 2024 में हुआ, जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिल्ली में PMO, केंद्रीय गृहमंत्री कार्यालय, CBI और ED मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद केंद्र के निर्देश पर EOW ने जांच शुरू की और पांच लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की।
जांच के बाद बंद हुई श्री शारदा इंडस्ट्रीज
EOW की जांच के दायरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज का संचालन बंद कर दिया गया है। कंपनी की वेबसाइट पर फिलहाल स्टेटस ‘टेंपरेरी क्लोज्ड’ बताया जा रहा है। EOW के अनुसार, यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा, रायपुर में स्थित है और इसके संचालक को जांच के दायरे में लाया गया है।
रिएजेंट खरीदी और अव्यवस्था
जांच में यह भी सामने आया कि जरूरत न होते हुए भी जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 के बीच कांग्रेस शासन काल में अरबों रुपए के रिएजेंट खरीदे गए। CGMSC और बड़े अस्पतालों के गोदाम रिएजेंट से भर गए थे। इसके बावजूद 300 करोड़ रुपए के रिएजेंट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेजे गए, जहां न CBS मशीन थी, न लैब और न ही तकनीशियन। कई रिएजेंट्स की एक्सपायरी मात्र 2–3 माह शेष थी, जिसके चलते उन्हें खराब होने से बचाने के लिए 600 फ्रिज खरीदने की तैयारी तक की गई। ACB/EOW ने साफ किया है कि CGMSC घोटाले में शामिल सभी अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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