छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान केंद्रों में चूहों से नुकसान पर हंगामा, नारेबाजी के बीच विपक्षी विधायक सस्पेंड

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को धान खरीदी केंद्रों में चूहों द्वारा धान को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन आसंदी ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य वेल तक पहुंच गए, जिसके चलते उन्हें सदन से निलंबित कर दिया गया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि चूहों के कारण और सरकार के कुप्रबंधन से लगभग 4600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार धान की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मुसवा’ (चूहों) के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है। स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्षी विधायक फिर से वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी की। इसके चलते उन्हें स्वमेव निलंबित कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया।

इससे पहले सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के मुद्दे पर भी सदन में तीखी बहस और नारेबाजी हुई। हर्षिता स्वामी बघेल ने सहकारी केंद्रीय बैंक के भवन निर्माण का मामला उठाते हुए कहा कि वर्क ऑर्डर, टेंडर और भूमि पूजन होने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। इस पर मंत्री केदार कश्यप ने जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में निर्माण की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन वहां पार्किंग और अन्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, इसलिए दूसरी जगह जमीन तलाश की जा रही है। इस जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया।

नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने सरकार पर अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और अतिक्रमण हटाने की स्पष्ट समय-सीमा बताने की मांग की। मंत्री कश्यप ने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर को पत्र भेजा गया है और जल्द कार्रवाई की जाएगी। सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। ओवरलोडिंग और बिना परमिट चलने वाले वाहनों के मामलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ऐसे 77,810 प्रकरण दर्ज किए गए और 42 करोड़ 79 लाख रुपए से अधिक की वसूली की गई है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों में नेशनल हेराल्ड को 4.24 करोड़ रुपए और संडे नवजीवन को 3.06 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए गए, जबकि नवसृजन पत्रिका को कोई भुगतान नहीं किया गया। दिनभर चले हंगामे और वॉकआउट के बीच विधानसभा की कार्यवाही कई बार बाधित रही। विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक विफलता और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए, जबकि सरकार ने सभी आरोपों को निराधार बताया।

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