रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्यपाल रमण डेका को पत्र लिखकर इस विस्तार को असंवैधानिक करार दिया है। महंत का आरोप है कि 20 अगस्त को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य में मंत्रियों की संख्या 14 हो गई है, जो संवैधानिक सीमा से अधिक है। महंत ने संविधान के अनुच्छेद 164(1क) का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के 90 सदस्यों के आधार पर मंत्रिपरिषद का आकार 13 से अधिक नहीं हो सकता। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि स्थिति को सुधारने के लिए मंत्रिपरिषद से एक मंत्री को तत्काल हटाया जाए।
पत्र में महंत ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि राज्य गठन के समय अजीत जोगी सरकार में 26 मंत्री थे, जबकि रमन सिंह सरकार में यह संख्या 17 तक रही। बाद में इसे घटाकर 13 कर दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि 8 जनवरी 2019 को मंत्रियों की संख्या 13 से 14 करने के प्रस्ताव का भाजपा ने सदन में विरोध किया था और वॉकआउट किया था।
महंत के पत्र से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस विस्तार को नियमविरुद्ध बताया था। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में रहते हुए जिस संशोधन का विरोध कर रही थी, अब सत्ता में आकर उसी का लाभ उठा रही है।
संविधान का अनुच्छेद 164(1क) स्पष्ट करता है कि किसी भी राज्य में मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या का 15% से अधिक नहीं हो सकती, जबकि न्यूनतम संख्या 12 से कम नहीं होगी। छत्तीसगढ़ के 90 विधायकों के हिसाब से अधिकतम 13 मंत्री हो सकते हैं, ऐसे में मौजूदा 14 मंत्रियों के कारण संवैधानिक विवाद गहराता जा रहा है।