रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित अटेंडेंस मॉनिटरिंग सिस्टम को सख्ती से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जहाँ अच्छे शिक्षक कार्य कर रहे हैं, उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन मिलना चाहिए, वहीं जो शिक्षक अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
◆ विद्यालयों में उपस्थिति और ड्रॉपआउट पर निगरानी
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। अनुपस्थित बच्चों के अभिभावकों से सीधे संपर्क किया जाए ताकि ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि राज्य में Gross Enrolment Ratio (GER) को 100 प्रतिशत तक पहुँचाया जाए। हर बच्चे का स्कूल में नामांकन और उपस्थिति अनिवार्य की जाएगी।
◆ स्थानीय भाषा में शिक्षा का नवाचार
बीजापुर जिले के प्रयोग की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय युवाओं की मदद से ‘गोंडी भाषा’ में शिक्षा देने का मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किया जाए। इस मॉडल से बच्चों की रुचि और उपस्थिति दोनों में वृद्धि हुई है।
◆ डिजिटल शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक सभी विद्यार्थियों का 12 अंकों का APAR ID बनाया जाए, जिसे डिजिलॉकर से जोड़ा जाएगा। यह व्यवस्था छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकों के वितरण में सहायक होगी।
साथ ही पीएम ई-विद्या और यू-ट्यूब चैनलों के माध्यम से डिजिटल शिक्षण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
◆ अच्छे कार्य की सराहना
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को प्रेरित करने के लिए ‘शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ शुरू की जाएगी, जिसके अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने दंतेवाड़ा जिले की सराहना करते हुए कहा कि वहाँ 10वीं बोर्ड परीक्षा में 9.32 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया, जो शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की मेहनत का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि शिक्षक ही शिक्षा सुधार की आत्मा हैं। यदि शिक्षक प्रेरित हैं, तो शिक्षा प्रणाली अपने आप सशक्त हो जाएगी।