रायपुर। छत्तीसगढ़ में ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में शीतलहर चलने की संभावना जताई है। मंगलवार को मैनपाट में तापमान गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे घास पर जमी ओस की बूंदें बर्फ में तब्दील हो गईं। वहीं, पेंड्रा और अंबिकापुर में भी तापमान में गिरावट जारी है। सुबह-शाम लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।
मैदानी इलाकों में दुर्ग सबसे ठंडा रहा, जहां रात का तापमान सामान्य से 7 डिग्री कम होकर 10.2 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेश में अधिकतम तापमान 30.7°C जगदलपुर में और न्यूनतम 7.6°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।
पेंड्रा में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई। ग्रामीण इलाकों में लोग ठंड से बचने के लिए जगह-जगह अलाव जलाते दिखाई दे रहे हैं।
◆ नवंबर का मौसम रिकॉर्ड
मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर महीने में कभी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़े तो कभी गर्मी ने। 2 नवंबर 1935 को अधिकतम तापमान 35.6°C दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे गर्म नवंबर दिन रहा है। वहीं 22 नवंबर 1883 को न्यूनतम तापमान 8.3°C रिकॉर्ड किया गया था — जो नवंबर माह की सबसे ठंडी रात मानी जाती है। बारिश के मामले में भी नवंबर कई रिकॉर्ड रखता है। 1924 में पूरे महीने में 138.2 मिमी वर्षा हुई थी, जबकि 2 नवंबर 1930 को एक ही दिन में 70.4 मिमी बारिश हुई थी — जो अब तक का एकदिवसीय रिकॉर्ड है।
◆स्वास्थ्य अलर्ट: मलेरिया का खतरा बढ़ा
मौसम में बदलाव के साथ मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।एमडी मेडिसिन डॉ. विकास अग्रवाल का कहना है कि ठंड के साथ-साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।
उन्होंने लोगों को सतर्क रहने और इन सावधानियों का पालन करने की सलाह दी है— शाम के बाद मच्छरदानी, कॉइल या लिक्विड का उपयोग करें।घर में पानी जमा न होने दें — कूलर, टायर, गमले, बाल्टी आदि साप्ताहिक रूप से साफ करें। पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें। बुखार या ठंड लगने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।