बिलासपुर | YC न्यूज़ डेस्क ! छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और शिक्षकों के बीच विवाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी तूल पकड़ता जा रहा है। शिक्षकों पर दुर्व्यवहार, पढ़ाई में लापरवाही और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रही छात्राओं का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें कलेक्टर संजय अग्रवाल शिक्षकों की कमी का हवाला देते सुनाई दे रहे हैं, जबकि एडिशनल कलेक्टर शिव बनर्जी छात्राओं से कहते हैं कि उनकी ‘ऊंची भाषा’ सही नहीं है और वे बाहर निकल जाएं। इस मामले में छात्राएं शिक्षकों को निलंबित करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। वहीं, प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने शिक्षकों का पक्ष रखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वायरल वीडियो में क्या कहते सुनाई दे रहे अधिकारी?
1 अक्टूबर 2026 के बताए जा रहे वायरल वीडियो में छात्राओं की शिकायतों के दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि यदि चार शिक्षकों को निलंबित कर दिया जाएगा, तो उनकी जगह शिक्षक कहां से लाए जाएंगे। उनका कहना है कि दूसरे स्कूलों से शिक्षक लाने पर वहां के विद्यार्थी भी विरोध और चक्काजाम कर सकते हैं। इसी दौरान एडिशनल कलेक्टर शिव बनर्जी छात्राओं से कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनकी भाषा सही नहीं है और वे बाहर निकल जाएं। अधिकारियों की बातचीत का यह वीडियो सामने आने के बाद छात्राओं की शिकायतों पर प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वीडियो के पूरे संदर्भ और अधिकारियों के पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
छात्राओं ने शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप
मल्हार स्कूल की छात्राओं ने अलग-अलग शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें करते हुए कार्रवाई की मांग की है। उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- एएफ प्रभारी शिक्षिका संगीता यादव पर आरोप: छात्राओं का दावा है कि शिक्षिका पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रही हैं और राशि के हिसाब में गड़बड़ी है। छात्राओं ने शिकायत करने पर प्रोजेक्ट के अंक काटने और परीक्षा में फेल करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
- संस्कृत व्याख्याता संजय दुबे पर आरोप: छात्राओं ने कक्षा में पढ़ाई में लापरवाही, अभद्र भाषा और अश्लील टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। उन्होंने शिक्षक की शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों की वैधता की जांच कराने की मांग भी की है।
- गणित व्याख्याता काजल सोन पर आरोप: छात्राओं का कहना है कि कक्षा 10वीं में गणित की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं कराई जाती। उन्होंने शासन की ओर से वितरित किए जाने वाले नि:शुल्क सैनिटरी पैड में अनियमितता और एक्सपायरी पैड बांटने का आरोप भी लगाया है। छात्राओं ने दावा किया कि इससे एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई।
ये सभी आरोप छात्राओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर होनी बाकी है।
प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को हटाने के निर्देश
छात्राओं के विरोध प्रदर्शन के बाद मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। इसके बाद कलेक्टर की मंजूरी से जिला शिक्षा अधिकारी ने 9 अक्टूबर को प्राचार्य और दो शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजने के निर्देश जारी किए।
आदेश के अनुसार:
- प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला को मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा भेजने के निर्देश दिए गए।
- व्याख्याता रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पचपेड़ी भेजने का निर्देश दिया गया।
- व्याख्याता संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ओखर भेजने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, इस कार्रवाई से छात्राएं संतुष्ट नहीं हुईं। उनका कहना है कि केवल स्थानांतरण से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने संबंधित शिक्षकों को निलंबित करने और आरोपों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
13 दिन के भीतर दूसरी बार कलेक्ट्रेट पहुंचीं छात्राएं
पहले विरोध प्रदर्शन के बाद कार्रवाई होने के बावजूद छात्राओं ने 14 अक्टूबर को दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। छात्राओं की मांग है कि शिक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष अब महत्वपूर्ण होंगे।
शिक्षकों के समर्थन में आया प्राचार्य कल्याण संघ
दूसरी ओर, प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने संबंधित प्राचार्य एवं शिक्षकों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। संघ ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा का कहना है कि प्राचार्य का पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं है। संघ के अनुसार, प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला ने नवंबर 2025 में पदभार संभालने के बाद स्कूल में अनुशासन, पढ़ाई की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया था।
संघ का दावा है कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी इन सुधारों में सहयोग नहीं कर रहे थे, जिससे स्कूल के भीतर तालमेल की समस्या बढ़ी। हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है। संजय शर्मा ने यह भी कहा कि प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी सेवा अवधि समाप्त होने में एक वर्ष से भी कम समय बचा है। इसके बावजूद वे नियमित रूप से स्कूल आकर व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। संघ की मांग है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका पक्ष सुना जाए।
अब जांच और प्रशासनिक जवाब पर टिकी नजरें
मल्हार स्कूल का यह मामला अब छात्राओं की शिकायतों, शिक्षकों के बचाव और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच उलझ गया है। एक ओर छात्राएं दुर्व्यवहार और पढ़ाई से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई चाहती हैं, तो दूसरी ओर शिक्षक संगठन निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों को सुनने की मांग कर रहे हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि छात्राओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? साथ ही, वायरल वीडियो में अधिकारियों की बातचीत को लेकर भी प्रशासन का स्पष्ट पक्ष सामने आना जरूरी है, ताकि मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सके।