बिलासपुर | YC न्यूज़ डेस्क ! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आज, 22 अक्टूबर को बिलासपुर पहुंचेंगे। उनके दो दिवसीय दौरे के दौरान संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठकें होंगी। इस दौरे को छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि प्रदेश को रायपुर और बिलासपुर, दो अलग-अलग प्रांतों में बांटने की योजना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संघ प्रमुख के दौरे को लेकर बिलासपुर में तैयारियां की गई हैं। सरस्वती शिशु मंदिर, कोनी परिसर और रेलवे स्टेशन सहित प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
शाम 4 बजे पहुंचेंगे बिलासपुर, बौद्धिक वर्ग को करेंगे संबोधित
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मोहन भागवत नागपुर से गोंडवाना एक्सप्रेस के जरिए बिलासपुर पहुंचेंगे। यहां से वे सीधे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर जाएंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आयोजित बौद्धिक वर्ग में वे संघ के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और विभिन्न आनुषंगिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इस दौरान देश और समाज से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देने के साथ संगठन की भावी गतिविधियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। कार्यक्रम के बाद वे सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में रात्रि विश्राम करेंगे।
छत्तीसगढ़ में दो प्रांत बनाने की चर्चा
संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव इस दौरे का प्रमुख विषय माना जा रहा है। संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में छत्तीसगढ़ में एक प्रांत के अंतर्गत संगठनात्मक गतिविधियां संचालित होती हैं। प्रस्तावित बदलाव के तहत प्रदेश को रायपुर और बिलासपुर, दो अलग-अलग प्रांतों में विभाजित करने पर विचार हो सकता है। फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रांत में 11 विभाग बताए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में छह विभाग रायपुर और पांच विभाग बिलासपुर के अंतर्गत रखे जा सकते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य संगठनात्मक कार्यों का विकेंद्रीकरण करना और स्थानीय स्तर पर गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, प्रांत विभाजन और पदों में संभावित बदलाव को लेकर अंतिम निर्णय संगठन के स्तर पर होना बाकी है।
23 अक्टूबर को प्रांत कार्यकारिणी की बैठक
डॉ. भागवत के दौरे के दूसरे दिन, 23 अक्टूबर को संघ के प्रांत पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक प्रस्तावित है। इसमें बिलासपुर नगर के 11 उपनगरों सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी है। बैठक में संगठन की मौजूदा गतिविधियों, कार्य विस्तार और आगामी योजनाओं पर चर्चा हो सकती है। संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर भी पदाधिकारियों के बीच विचार-विमर्श होने की संभावना जताई जा रही है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की होगी समीक्षा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा भी दौरे का अहम हिस्सा होगी। प्रांत, विभाग और योजना स्तर के पदाधिकारी अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। बैठकों में निर्धारित कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन करने के साथ आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी। संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक गतिविधियों को गति देने के विषय भी एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
युवाओं को संगठन से जोड़ने पर रहेगा जोर
संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, युवाओं को संगठन और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत 40 वर्ष से कम आयु के लोगों की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति पर काम किए जाने की चर्चा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) जैसे संगठनों से जुड़े युवाओं की भूमिका को लेकर भी मार्गदर्शन दिए जाने की संभावना है। हालांकि, इन संगठनों के युवाओं के लिए किसी विशेष कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सभी की नजरें 23 अक्टूबर की बैठक पर टिकी हैं। यदि रायपुर और बिलासपुर में अलग-अलग प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर सहमति बनती है, तो छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक संचालन और पदों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।